केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर की रिहाई के मामले में नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों की सहमति थी। ये बातें डॉ. सिंह ने कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस द्वारा मसूद की रिहाई पर उठाए जा रहे सवाल के जवाब में कहीं।
जम्मू में रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 1999 में विमान अपहरण मामले के बाद देश भर में यात्रियों को सुरक्षित रिहा करवाने की मांग हो रही थी। ऐसे में अटल बहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने सभी विपक्षी दलों से बातचीत कर सर्वसम्मति से फैसला लिया था। फैसला अकेले भाजपा का नहीं था। उस समय विपक्षी दलों में राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी से इस संदर्भ में पहली बैठक की गई थी। ऐसे में राहुल गांधी के आरोपों के अनुसार सोनिया गांधी भी बराबर की जिम्मेदार है।
डॉ. फारूक अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कांफ्रेंस उस समय एनडीए का हिस्सा थी। ऐसे में पूर्ववर्ती सरकार के फैसले के लिए नेकां भी बराबर की जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि अगर 1947 के इतिहास पर जाए तो राहुल गांधी के परनाना प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने पहली गलती जम्मू कश्मीर के लोगों पर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला को थोप कर की।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दूसरी गलती शेख अब्दुल्ला को राज्य का मुख्यमंत्री बनाकर की। तीसरी गलती फारूक अब्दुल्ला सरकार को गिराकर जीएम शाह को मुख्यमंत्री बनाकर की गई और राज्य में चौथी बड़ी गलती 1987 के चुनाव में धांधली होना है। उन्होंने अलगाववादी नेताओं खासतौर से मीरवाइज उमर फारूक को एनआईए के समन का बचाव करते हुए कहा कि धार्मिक नेताओं को कानून के मामले में कोई छूट नहीं दी जा सकती है।