नगरोटा में बन टोल प्लाजा पर शुक्रवार को मुठभेड़ में मारे गए आतंकी यदि यहां से सुरक्षित निकल जाते तो भारी तबाही मचा सकते थे। आतंकियों के पास से बरामद गोला-बारूद और असलहा अति विशिष्ट लोगों को मिले बुलेटप्रूफ वाहनों को भी भेदने की क्षमता रखता था। आतंकियों के पास गोला-बारूद लेबल 3 की सुरक्षा को भेदने वाला था। इस श्रेणी की सुरक्षा उपराज्यपाल, उनके सलाहकार और सुरक्षा एजेंसियों के बड़े अधिकारियों के पास है।
सूत्रों का कहना है कि आतंकियों के पास स्टील की गोलियां, पिस्टल, अमेरिका की एम 4 गन सहित 52 आइटम थे। ऐसे में यह साफ है कि यह आतंकी जम्मू-कश्मीर में वीवीआईपी लोगों को निशाना बनाने के मकसद से घुसे थे। इससे पहले वर्ष 2018 में अवंतीपोरा में सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले में इस तरह का सामान बरामद हुआ था। इस बरामदगी से तमाम एजेंसियां सकते में हैं।
सीआरपीएफ और पुलिस के 100 से अधिक जवानों ने चलाया तलाशी अभियान
बन टोल प्लाजा पर आतंकी हमले के बाद शनिवार को एनआईए की टीम भी मौके पर पहुंची और जरूरी सबूत जुटाए। कई लोगों से टीम ने पूछताछ की है। वहीं कश्मीर जाने वाले ट्रक में आतंकियों के छुपे होने की घटना के बाद कश्मीर आने-जाने वाले वाहन भी सुरक्षा एजेंसियों के राडार पर हैं। शनिवार को टोल प्लाजा पर वाहनों की चेकिंग के लिए गहन तलाशी अभियान चलाया गया। हर आने जाने वाले वाहन चालकों के पहचान पत्र और दस्तावेज जांचे गए। 100 से अधिक पुलिस कर्मियों और सीआरपीएफ कर्मियों को इस कार्य के लिए लगाया गया था।