जेसीबी भी 12, चाहिए 30, डंपिंग साइट में ही बिखरा रहता है कचरा
- सफाई कर्मचारियों का भी टोटा, 800 कर्मियों की दरकार, ऑटो सुविधा भी प्रति वार्ड दो ही, चाहिए तीन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए नगर निगम के दावे कमजोर साबित हो रहे हैं। वार्डों में डंपिंग साइट पर कचरा दिन भर बिखरा रहता है। कुछ डंपिंग साइट हफ्ते या दस दिन में एक ही बार साफ होती हैं। सही तरीके से सफाई न होने का कारण - नगर निगम के पास वाहनों की कमी है।
मौजूदा समय में हर वार्ड से सुबह आठ बजे तक डंपिंग साइट साफ करने के लिए 75 टिप्परों की जरूरत है, जबकि नगर निगम के पास मात्र 30 है। कमी के कारण एक बार वार्ड में डंपिंग साइट साफ हो जाती है, लेकिन दोपहर बाद आने वाले कचरे से डंपिंग साइट भरने पर दोबारा सफाई नहीं होती। ऐसे में कचरा बिखरा रहता है। राहगीर परेशान होते हैं। टिप्परों को भी कचरा फेंकने के लिए बीस किलोमीटर का सफर कोट भलवाल तक करना पड़ता है। यानी कोट भलवाल से वाहन को वापस पहुंचने में डेढ़ घंटा लग रहा है। इस कारण भी डंपिंग साइट दोबारा साफ नहीं हो पाती। दोपहर बाद हालत यह होती है कि जिन डंपिंग साइट में कचरा ज्यादा बिखरा होता है, वहीं पर सफाई होती है। अन्य दूसरे दिन साफ की जाती है। वहीं, जेसीबी की भी कमी खूब खल रही है। मौजूदा समय में 12 जेसीबी है, जबकि 30 की जरूरत है। जेसीबी कम होने के कारण एक बार डंपिंग साइट की सफाई हो जाती है तो दोबारा जेसीबी को दूसरे वार्ड में डंपिंग साइट खाली करने के लिए भेजा जाता है। शहर में हर वार्ड में डंपिंग साइट है। कुछ वार्डों से डंपिंग साइट को हटाया गया, लेकिन मगर लोगों ने फिर से उसी जगह कचरा फेंकना शुरू कर दिया।
मौजूदा समय में नगर निगम ने प्रति वार्ड दो-दो ऑटो की सुविधा दी है। ऑटो में सफाई कर्मी वार्डों में आठ बजे कचरा एकत्रित करने पहुंचते हैं, लेकिन जहां पर बड़े वार्ड हैं, यानी गांधीनगर, शास्त्रीनगर, त्रिकुटानगर, गंग्याल, सतवारी सहित अन्य वार्डों में तीन से चार ऑटो की जरूरत है।
सफाई कर्मचारियों की खल रही कमी
बेहतर सफाई न होने का बड़ा कारण सफाई कर्मचारियों का टोटा भी है। मौजूदा समय में 2700 कर्मचारी तैनात हैं। जरूरत 3500 के करीब है। अब एनजीओ के माध्यम से सफाई कर्मचारियों की तैनाती की जा रही है। सफाई कर्मचारी कम होने के कारण भी सही तरीके से सफाई नहीं हो पाती है।
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वाहनों की खरीद के लिए प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद वाहन खरीदे जाएंगे। मौजूदा समय में जेसीबी 12 ही हैं, जबकि 30 के करीब टिप्पर हैं। इस कारण भी सफाई करने में दिक्कत आती है। इनकी संख्या बढ़ाने के साथ सफाई व्यवस्था बेहतर की जाएगी।
- तलब महमूद, सीटीओ, नगर निगम