अमर उजाला ब्यूरो जम्मू। गणेश जी का चौड़ा मस्तक विवेक का प्रतीक है और बिना सत्संग के विवेक की प्राप्ति नहीं होती है। यह ज्ञान आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी सुचेतानंद ने संगत को दिया है।
जानकारी के अनुसार रविवार को दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से सत्संग आश्रम प्रवीण कॉलोनी, त्रिकुटा नगर में एक दिवसीय सत्संग हुआ। इसमें स्वामी ने संगत को अध्यात्म से जोड़ा है। उन्होंने बताया कि गणेश जी ने एक हाथ में वेद धारण किए हैं, जो जीवन में स्वाध्याय करने की प्रेरणा देते हैं। दूसरे हाथ में अंकुश है, जिससे वह मन पर नियंत्रित करने की प्रेरणा देते हैं। तीसरे हाथ में लड्डू है, प्रभु कृपा रूपी प्रसाद का प्रतीक है। चौथा हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में है जो आशीष प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि ब्रह्म ज्ञान के लिए ध्यान साधना प्रत्येक समस्या का रामबाण इलाज है। साधक की साधना उसे मानसिक शांति प्रदान करती है। कार्यक्रम का समापन विश्व शांति के लिए सामूहिक ध्यान साधना से किया गया।इस मौके पर दीप सहगल और अभिषेक सहगल ने भजनों से संगत को झूमने पर मजबूर कर दिया।