संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। नगर निगम का पांच साल का कार्यकाल 14 नवंबर को खत्म होने जा रहा है। अभी तक चुनाव कार्यालय की तरफ से चुनाव की तारीख की घोषणा नहीं की गई। वहीं, श्रीनगर नगर निगम का कार्यकाल 5 नवंबर को समाप्त होगा।
इसी बीच, निगम चुनाव में देरी लोगों के लिए परेशानी बन सकती है क्योंकि पार्षदों के सभी प्रकार के अधिकार खत्म हो जाएंगे। इससे दस्तावेज सत्यापित (अटेस्ट) जैसे सामान्य कार्यों के लिए लोगों को दफ्तरों में भटकने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। वहीं, पांच साल में सिर्फ 20 बार हाउस लगा। 487 प्रस्ताव आए जिनमें 240 ही पास किए गए। नियम के अनुसार हर महीने एक बार हाउस लगाना जरूरी है। कोरोना के दो साल को निकाल दें तो भी 36 बार सदन लगना चाहिए था। कार्यकाल खत्म होते ही सबसे जरूरी काम फॉगिंग, सफाई, पेंशन, जाति व रिहायशी प्रमाण पत्र या फिर किसी भी तरह की अनुमति लेने के लिए लोगों को भटकना पड़ेगा। एक दिन में काम होने के बजाय हफ्ते लग सकते हैं। इसी तरह मेयर, डिप्टी मेयर के कार्यालय पर उनका अधिकार नहीं रहेगा। दोनों कार्यालयों से नेम प्लेट्स हटा दी जाएंगी। पार्षदों को भी आम नागरिकों की तरह निगम में तव्वजो दी जाएगी। उधर, पार्षदों की मांग है कि चुनाव जल्द होने चाहिए, नहीं तो आम जनता की परेशानियां बढ़ेंगी। वहीं, कुछ पार्षदों का दावा है कि पंचायती राज संस्थाएं (पीआरआई) न होने से पारदर्शिता पर सवाल उठेंगे।
जवाबदेही में आएगी कमी
मेयर राजेंद्र शर्मा ने कहा कि कार्यकाल 14 की रात को खत्म हो जाएगा। इसके बाद भी लोगों का काम करते रहेंगे। पीआरआई न होने से पारदर्शिता और जवाबदेही में कमी आएगी। फंड के बारे में कहा कि पहली बार पैसा मई में लाया गया, उससे पहले अगस्त में आता था। इस वजह से ग्रांट लेप्स हो जाती थी। चुनाव जल्द नहीं होने से फंड की समस्या आने की संभावना है। वहीं, विपक्ष नेता द्वारका चौधरी के अनुसार जो काम सत्ता पक्ष नहीं करवा पाता था वह करवाने की कोशिश करते थे। यह तभी हो पाता है जब लोगों के चुने हुए नुमाइंदे हो। 10 दिन बाद लोगों के काम के लिए भागेंगे लेकिन हस्ताक्षर का कोई महत्व नहीं रहेगा। इसलिए लोगों को अलग-अलग दफ्तरों में जाना पड़ेगा।
पार्षदों का कार्यकाल पूरा होने से काम बढ़ेगा। इसलिए जल्द चुनाव होने चाहिए ताकि पीआरआई हो और लोकतंत्र मजबूत बना रहे। अगर चुनाव समय पर नहीं होते तो भी सभी प्रकार की जिम्मेदारी निभाई जाएगी।
-राहुल यादव, नगर निगम आयुक्त