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साइबर क्राइम में CBI जांच नहीं चाहती मुफ्ती सरकार

Sun, 17 May 2015 10:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
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हैकिंग और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मामलों की सीबीआई जांच के लिए रियासत ने अभी सीबीआई के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को पूर्व सहमति प्रदान नहीं की है। देश के आठ राज्यों ने ऐसी सहमति प्रदान कर दी है, लेकिन रियासत से अभी इसका कोई जवाब नहीं गया है।
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सूचना प्रौद्योगिक अधिनियम 2000 के तहत अपराधों की सीबीआई जांच के लिए कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (कार्मिक विभाग) ने देश के सभी राज्यों से पूर्व सहमति प्रदान करने को लिखा था। सहमति मिलने पर सीबीआई सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कंप्यूटर आधारित दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़, कंप्यूटर प्रणाली के साथ हैकिंग और इलेक्ट्रानिक रूप में अश्लील जानकारियां प्रकाशित करने की सीधी जांच कर सकेगी, जो अधिनियम के अनुसार अपराध की श्रेणी में आता है।

उल्लेखनीय है कि किसी राज्य के अधिकार क्षेत्र के अंदर सीबीआई किसी अपराध की जांच संबंधित राज्य की सहमति के बिना नहीं कर सकता। इसलिए सीबीआई के कार्मिक विभाग ने सभी राज्यों से इसकी पूर्व सहमति मांगी गई थी। अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में सोमवार को सीबीआई कार्मिक विभाग की एक बैठक तमाम राज्यों के प्रधान सचिवों से होने वाली है, जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा कर पूर्व सहमति मांगी जाएगी।
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इसके अलावा कार्मिक विभाग जम्मू-कश्मीर में अतिरिक्त विशेष सीबीआई अदालतें स्थापित करने पर भी विचार कर रहा है। देशभर में 22 अतिरिक्त विशेष सीबीआई अदालतों में से 17 काम कर रही हैं, जबकि जम्मू कश्मीर, बंगाल और आंध्र प्रदेश में यह कार्यरत नहीं है। रियासत में यह अदालत स्थापित करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह रियासती सरकार से किया गया है। जम्मू-कश्मीर और आंध्र प्रदेश में एक-एक तथा बंगाल में ऐसी तीन अदालतें स्थापित की जानी हैं।
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