रैली के दौरान पीएम मोदी व महबूबा मुफ्ती
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकेतों में पाकिस्तान की बिगड़ती हालत पर कटाक्ष किया और अलगाववादियों की पाक परस्त नीति पर भी प्रहार किया। एशिया की सबसे बड़े सड़क टनल का उद्घाटन करते हुए मोदी ने कहा कि वे जो सीमा पार बैठे हैं, खुद ही संभल नहीं पाते हैं।
पीएम ने पाक की लचर अर्थव्यवस्था और पीओके में गरीबी की ओर इशारा करते हुए जम्मू कश्मीर के विकास से पीओके की बर्बादी का सच उजागर होगा। उन्होंने कश्मीर के हिस्से पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे पर भी सवाल उठाया।
पीएम ने कश्मीर के भटके युवकों को शानदार विरासत और परंपरा की याद दिलाते हुए विकास की मुख्य धारा में शामिल होने का न्योता दिया। पत्थरबाजी के लिए उकसाने वाले अलगाववादियों और उपद्रवियों का नाम लिए बगैर मोदी ने भटके युवकों को कश्मीर के विकास की यात्रा में शामिल होने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के ही युवकों ने हिमालय की छाती चीर कर पत्थरों को काटकर विकास के लिए सुरंग तैयार किया है। यह सुरंग नहीं, बल्कि विकास की छलांग है। पत्थर बरसाने वाले युवक विकास के भाग्य रेखा की हकीकत को समझें।
कश्मीर के विकास के लिए 9 और टनल
चिनैनी नाशरी टनल में पीएम मोदी
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प्रधानमंत्री ने कहा कि जम्मू कश्मीर के विकास के लिए और टनल बनाए जाएंगे। कश्मीर देखने का सपना देश के हर नागरिक का होता है। यहां टूरिस्टों के लिए सुविधाएं होंगी तो पर्यटन बढ़ेगा। यह तय करना होगा कि कश्मीर के भाग्य को किस दिशा में ले जाना है।
40 साल के खून के खेल से किसी का फायदा नहीं हुआ। निर्दोष लोगों की जानें गईं और कश्मीर की मां ने अपने लाल खोए। कश्मीर को लहूलुहान किया गया।
मोदी ने कहा कि उन्होंने जो 80 हजार करोड़ का विशेष पैकेज जम्मू कश्मीर को दिया था, उस पर तेजी से काम हो रहा है। सालाना बजट के आधे से अधिक बजट का खर्च जमीन पर दिखने लगा है। हम विकास करके दिखाएंगे।
ग्लोबल वार्मिंग के मुद्दे पर विकसित देशों को संदेश
चिनैनी नाशरी टनल में पीएम मोदी
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प्रधानमंत्री ने कहा कि चिनैनी नाशरी टनल का निर्माण उन लोगों के सामने उदाहरण है जो ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण संरक्षण के लिए चिंता करते हैं। हिमालय की कोख में बना यह टनल पर्यावरण संरक्षण को पूरी दुनिया को संदेश है।
देश के किसी और कोने में ऐसा हुआ तो पर्यावरणविदों का ध्यान कम होता। हिमालय की छाती के अंदर बना टनल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। गौरतलब है कि टनल बनाने में एक भी पेड़ नहीं काटा गया और टनल से कार्बन उत्सर्जन भी शून्य है।