जम्मू। चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से लेकर पाकिस्तान से सटी नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर अब हाई स्पीड इंटरनेट समेत सभी संचार सेवाएं मजबूत होंगी। केंद्रीय संचार मंत्रालय ने यूनिफाइड एक्सेस सर्विसेज लाइसेंस एग्रीमेंट (यूएएससल) के नियमों में संशोधन कर सुरक्षा परिस्थितियों की तीन शर्तें हटा दी हैं। मंगलवार को इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। इससे कंपनियों को सेवाएं देने में आसानी होगी।
पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर मई 2020 से जारी चीन से तनाव के बीच सरहदी इलाकों में संचार सेवाओं को सुधारने के लिए लगातार जरूरत महसूस की जा रही है। पिछले दिनों ही सेना की ओर से एलएसी पर 4जी व 5जी सेवाओं के लिए सशर्त निविदाएं मांगी गई थीं, लेकिन इन इलाकों में लाइसेंस के लिए कड़ी शर्तें आड़े आ रही हैं। सामरिक जरूरत को देखते हुए यूएएसएल की सुरक्षा परिस्थितियों से जुड़े क्लॉज 41.9(1), 41.9(2) और 41.9(3) को संशोधन कर हटा दिया गया है।
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एलएसी पर चीन लगा चुका 4जी टॉवर
पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर मई 2020 से जारी तनातनी और गलवां घाटी में झड़प के बाद चीन ने एलएसी पर संचार नेटवर्क मजबूत कर लिया है। लद्दाख के अग्रिम इलाकों से चीन के 4जी मोबाइल टॉवर भी दिखाई देते हैं। चुशुल निर्वाचन क्षेत्र के पार्षद कोंचोक स्टैंजिन ने चीन के कब्जे वाले क्षेत्र में लगाए गए हाई स्पीड इंटरनेट मोबाइल टॉवर की फोटो सोशल मीडिया पर साझा की थी।
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ये शर्तें जिन्हें हटाया गया
41.9(1) मोबाइल फोन सेवाओं के लिए लगने वाले बेस स्टेशन, सेल साइट या रेडियो ट्रांसमीटर बॉर्डर से निर्धारित दूरी पर लगाने होंगे। यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सरहद के पास जाते ही सिग्नल खत्म हो जाए।
41.9 (2) एलओसी, एलएसी और अखनूर से पठानकोट समेत अन्य निर्धारित अंतरराष्ट्रीय सीमा के 10 किलोमीटर के दायरे में दूर संचार सुविधाएं देने के लिए उपकरण लगाने से पूर्व लाइसेंस देने वाली अथॉरिटी व लोकेशन पर तैनात सेना से अनुमति लेनी होगी। आपात स्थिति में संचार स्टेशन को बंद करने का आदेश सैन्य यूनिट के कमांडेंट भी जारी कर सकेंगे।
41.9 (3) उक्त शर्तों पर अमल को सुनिश्चित करने के लिए लाइसेंस जारी करने वाली अथॉरिटी और सैन्य अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण कर सकेंगे और उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान होगा।