संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। सावन माह के समापन के साथ ही रक्षा बंधन से त्योहारी सीजन की शुरुआत हो गई है। इसके बाद जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, नवरात्र, दशहरा और दीपावली सहित कई प्रमुख त्योहार लगातार आने वाले हैं। त्योहारों के इस लंबे दौर में घरों में मिठाइयां और पारंपरिक पकवान बनाने की वर्षों पुरानी परंपरा रही है। लेकिन इस बार चीनी के दामों में अचानक आई बढ़ोतरी ने त्योहारों की तैयारियों का बजट बिगाड़ दिया है।
चीनी के दाम में 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी के बाद अब मिठाई कारोबारियों की लागत भी बढ़ गई है। ऐसे में त्योहारी सीजन में मिठाइयों की कीमत 50 से 100 रुपये प्रति किलो तक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। चीनी की कीमत बढ़ने का सीधा असर उन मिठाइयों और पकवानों पर पड़ रहा है, जिनमें चीनी की खपत अधिक होती है। घरों में बनने वाली खीर, हलवा, शकरपारे और अन्य पारंपरिक पकवानों के अलावा बाजार में बिकने वाले गुलाब जामुन, रसगुल्ला, लड्डू सहित कई मिठाइयों में चीनी प्रमुख सामग्री होती है। ऐसे में चीनी महंगी होने से घरों में त्योहारों का बजट बढ़ना तय माना जा रहा है।
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पहले से तय कीमतों पर मिठाई बेच रहे कारोबारी
मिठाई कारोबारियों का कहना है कि फिलहाल वे पहले से तय कीमतों पर ही मिठाइयां बेच रहे हैं, लेकिन बढ़ती लागत के कारण लंबे समय तक ऐसा करना संभव नहीं होगा। कारोबारियों के अनुसार, मिठाई बनाने में चीनी के साथ दूध, खोया, घी, मेवा, गैस और अन्य सामग्री का इस्तेमाल होता है। इन सभी की लागत बढ़ने से पहले ही कारोबार पर दबाव बना हुआ है। कारोबारियों का कहना है कि गैस सिलेंडर की बढ़ी कीमतों ने पहले ही मिठाई कारोबार की लागत बढ़ा दी है। वहीं चीनी के दाम में 20 रुपये तक की वृद्धि ने परेशानी और बढ़ा दी है। त्योहारी सीजन में बिक्री बढ़ने की उम्मीद रहती है, लेकिन यदि लागत इसी तरह बढ़ती रही तो पुराने दामों पर मिठाई बेचना कारोबारियों के लिए घाटे का सौदा साबित हो सकता है।
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रक्षा बंधन के बाद बढ़ सकते हैं मिठाइयों के दाम
मिठाई कारोबारियों के अनुसार उनकी यूनियन की ओर से कीमतों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर विचार-विमर्श किया जा रहा है। कारोबारियों का अनुमान है कि रक्षा बंधन के बाद मिठाइयों की कीमतों में 50 से 100 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी की जा सकती है। कीमत बढ़ाने से ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, लेकिन दूसरी ओर लागत बढ़ने के कारण मौजूदा कीमतों पर कारोबार करना भी मुश्किल हो रहा है।
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बढ़ती लागत के बीच मिलावटी मिठाई का खतरा भी
त्योहारी सीजन में मिठाई की मांग अचानक बढ़ जाती है। ऐसे में चीनी के साथ दूध, खोया, घी, मेवा और अन्य कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी से मिठाई कारोबारियों पर लागत का दबाव और बढ़ जाता है। इसी बीच बाजार में मिलावटी मिठाइयों की आशंका भी बढ़ सकती है। यदि कुछ कारोबारी लागत कम करने के लिए घटिया या मिलावटी सामग्री का इस्तेमाल करते हैं तो इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। वहीं, लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से त्योहारी सीजन के दौरान मिठाई की दुकानों पर नियमित जांच और सैंपलिंग अभियान चलाने की मांग की है, ताकि मिलावट पर रोक लगाई जा सके ।