जम्मू। बीडीसी अध्यक्ष भूपेंदर सिंह के बेटे बलविंदर सिंह ने कहा कि मेरे पिता देश के लिए शहीद हुए हैं। अब सरकार को चाहिए वह उनके पिता के हत्यारों को सजा देकर उसे इंसाफ दिलाए। सरकार इसकी जांच करवाए कि हथियार बंद लोगों को कैसे पता चला कि वह गांव आने वाले हैं और उनके साथ सुरक्षा नहीं है। अगर सरकार हमे इंसाफ नहीं दे सकती है तो मुझे वर्दी पहना दे, मैं अपने पिता की हत्या का बदला लूंगा।
बलविंदर सिंह ने कहा कि बडगाम के उस क्षेत्र में 90 प्रतिशत मुस्लिम समुदाय के बीच सिख समुदाय के किसी व्यक्ति का इतने बड़े स्तर पर पहुंचना बड़ी बात है। उनके कारण सिख समुदाय का नाम और पहचान थी, जिसे मिटाने की कोशिश की गई है। यह सुरक्षा में चूक है, जिसके कारण मेरे पापा की हत्या हुई है।
कश्मीर में होना चाहिए आतंक का अंत
बलविंदर सिंह ने कहा कि पंजाब में अगर आतंक का अंत हो सकता है तो कश्मीर में भी होना चाहिए। मोदी सरकार से मांग कि मेरे पापा की हत्या के आरोपियों को पकड़ा जाए। सरकार के पास सभी संसाधन हैं, जिससे आरोपियों की धर-पकड़ की जा सकती है। अब समय आ गया है कि कश्मीर से आतंक का अंत होना चाहिए। यह सुरक्षा में बहुत बड़ी चूक है, अगर ऐसा नहीं होता तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती। यह पीएसओ का फर्ज था कि वह उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करे।
मेरा पति शेर था, देश पर कुर्बान हो गया
जम्मू। मेरा पति शेर था, वह जमीनी स्तर पर आसपास के लोगों से जुड़ा हुआ था। लोकप्रियता का आलम यह था कि वह मुस्लिम बहुल इलाके से भी निर्विरोध जीते थे। उनकी लोकप्रियता ही उनके लिए घातक बन गई और उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी। यह कहना है बडगाम जिले के खाग इलाके के दालवाश गांव में बुधवार की रात आतंकियों की गोली का शिकार हुए बीडीसी अध्यक्ष भूपेंदर सिंह की बदहवास पत्नी रबिंदर कौर का। सैनिक कॉलोनी के ई-सेक्टर में पूरा दिन गम का माहौल रहा। आसपास के लोग भी शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। इस दौरान पत्नी रबिंदर कौर बार-बार लगभग मूर्छित सी हो जाती थीं। वह लगातार कह रही थीं भूपेंदर कहते थे कि लोगों ने मुझे चुनकर अध्यक्ष बनाया, मुझे किस बात का डर है। स्थानीय लोगों और रिश्तेदारों ने भी कहा कि भूपेंद्र कर्मठ और निडर व्यक्ति थे जो सच के सिद्धांत पर चलते थे। वह अपने ब्लॉक और पंचायत में जमीनी स्तर से जुड़े हुए व्यक्ति थे। उन्हें हर धर्म के लोग पसंद करते थे।
जम्मू के शास्त्री नगर में अंतिम संस्कार
जम्मू। भूपेंद्र का पार्थिव शरीर वीरवार सुबह बडगाम से सड़क मार्ग से जम्मू के सैनिक कॉलोनी स्थित उनके घर पर लाया गया तो वहां का माहौल काफी गमगीन था। कोरोना संक्रमण के बावजूद लोग अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने वहां पहुंच रहे थे। बेटा बलविंदर सिंह, अतिंदर पाल सिंह और बेटी नमरत कौर पार्थिव शरीर को देखकर भी यकीन नहीं कर पा रह थे उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। देर शाम जम्मू के शास्त्री नगर में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रवींद्र रैना, पूर्व उप-मुख्यमंत्री कविंद्र गुप्ता ने भी शोक संतप्त परिवार से मिलकर संवेदना प्रकट की। शाम चार बजे दिवांग का अंतिम संस्कार किया गया। कोविड के कारण अंतिम संस्कार में कम लोग ही शामिल हो पाए।
15 अगस्त को गांव में पहली बार फहराया था तिरंगा
जम्मू। बेटे बलविंदर ने बताया कि बीडीसी अध्यक्ष भूपेंदर सिंह ने 15 अगस्त को परिवार के मना करने के बावजूद बडगाम स्थित गांव में तिरंगा झंडा फहराया था। यह पहला मौका था जब स्वतंत्रा दिवस के दिन गांव में तिरंगा फहराया और लोगों को संबोधित भी किया था। उनके इस फैसले से परिवार में काफी डर था कि कही कोई आतंकी संगठन उन्हें अपना निशाना न बना ले, लेकिन भूपेंदर सिंह कहते थे कि यह देश की बात है और देश के लिए सब कुर्बान है।
चुने हुए प्रतिनिधियों के पास पर्याप्त सुरक्षा नहीं
पंचायत कांफ्रेंस कमेटी के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने कहा कि पाकिस्तान प्रयोजित आतंकवाद कश्मीर में चुने हुए जन प्रतिनिधियों को टारगेट बना रहा है। उन्होंने कहा कि तमात वादों के बावजूद भी जमीन से जुड़े लोगों को सुरक्षा नहीं दी जा रही है।