जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद पाकिस्तान की सेना बंद रास्तों का इस्तेमाल करते हुए अब तक लगभग 60 आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की कोशिश कर चुकी है। यह आकलन उन खुफिया सूचनाओं के आधार पर है जिनमें कहा गया है कि सीमा पार से उत्तरी कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों तथा जम्मू क्षेत्र के पुंछ और राजोरी इलाकों से घुसपैठ में वृद्धि हुई है। हालांकि, सीमा पार से आतंकवादियों की घुसपैठ के बारे में सेना की ओर से आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।
सूत्रों के अनुसार, एलओसी से घुसपैठ के सफल व असफल प्रयासों के आकलन के लिए हाल ही में एक बैठक हुई। इसमें सेना के प्रतिनिधि को कश्मीर क्षेत्र के गुरेज, माछिल और गुलमर्ग सेक्टरों के ऊंचाई वाले इलाकों तथा जम्मू क्षेत्र के पुंछ और राजोरी इलाकों में आतंकी घुसपैठ के संबंध में विभिन्न एजेंसियों द्वारा जुटाए गए सबूत सौंपे।
डीजीपी दिलबाग सिंह ने पहले कहा था कि एलओसी पर घुसपैठ के अनेक प्रयास हुए जिनमें से ज्यादातर को विफल कर दिया गया। उन्होंने इस संभावना से इंकार नहीं किया था कि हो सकता है कुछ आतंकी घुसपैठ करने में सफल हो गए हों। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है।
गुलमर्ग के ऊंचाई वाले क्षेत्रों को 1990 के दशक के शुरू में मध्य कश्मीर में घुसपैठ के लिए इस्तेमाल किया जाता था। वर्ष 2014 में सेना तब आश्चर्यचकित रह गई थी जब उधमपुर में बीएसएफ के वाहन पर आत्मघाती हमले के प्रयास के बाद पकड़े गए आतंकवादी नवीद ने पूछताछ में बताया कि वे गुलमर्ग के ऊंचाई वाले क्षेत्र में उस्ताद पोस्ट से घुसपैठ कर कश्मीर घाटी पहुंचे थे।
अधिकारियों ने कहा कि अब लगता है कि घाटी में घुसपैठ के लिए यही रास्ता अपनाया गया है। इनमें से कुछ लोग बडगाम और पुलवामा के कई हिस्सों में दिखे हैं। आतंकवादियों का एक समूह पाखरपोरा के जरिए पुलवामा पहुंचने से पहले बाबा रेशी पहुंचा। आतंकवादियों का एक अन्य समूह बडगाम जिले में भी पहुंचा है।