जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के साथ दोस्ती की हरसंभव कोशिश की है। पाक को भी दोस्ती का जवाब दोस्ती से देना होगा। इसके अलावा कोई चारा नहीं है।
जिस प्रकार जनरल परवेज मुशर्रफ हां-ना करते-करते वार्ता की मेज पर आए उसी प्रकार पाक को भी आना होगा। यदि पाकिस्तान को बातचीत में विश्वास है तो उसे भी ऐसी कोशिश करनी होगी। वह यहां उजाला योजना के शुभारंभ के मौके पर बोल रही थीं।
महबूबा ने कहा कि दिल्ली में मोदी की सबसे ताकतवर सरकार है। यदि अभी कश्मीर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो फिर कभी नहीं होगा। महबूबा ने कहा, कश्मीर मसला क्या है यह 10 साल का बच्चा जानता है क्या? इसके पीछे कौन लोग हैं जो उन्हें सुरक्षा बलों के ठिकाने पर हमले के लिए उकसाते हैं।
70 साल का मसला दो दिन में तो ठीक नहीं हो सकता तो क्या स्कूल-कालेज बंद कर दिए जाएं। यह मामला राजनीतिक था, लेकिन जब इसमें पत्थर, हिंसा और कैंपों पर हमले को शामिल किया जाएगा तो बात कैसे बनेगी।
क्या सीरिया, लीबिया जैसी आजादी चाहते हैं हम?
कार्यक्रम में मौजूद महबूबा मुफ्ती
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महबूबा कश्मीर हिंसा पर भी जमकर बरसीं। कहा कि आखिर उनकी सरकार ने क्या खता की जो एक एनकाउंटर को इतना तूल दिया गया कि कश्मीर में इतना खूनखराबा हो गया।
वे किसे आजादी समझते हैं और क्या चाहते हैं? वे चाहते हैं कि आजादी की लड़ाई में नन्हें-नन्हें बच्चों की आंखों की रोशनी चली जाए या फिर वे अपाहिज हो जाएं? ऐसे बच्चों के मां-बाप से पूछना चाहिए कि वे क्या चाहते हैं। कश्मीर का हाल ऐसा हो गया है कि आप चाहकर भी स्कूल या दुकान नहीं खोल सकते। उन्हें पुलिस, सीआरपीएफ व आर्मी का डर नहीं है।
महबूबा बोलीं, क्या हम ऐसी आजादी चाहते हैं जो सीरिया, अफगानिस्तान, लीबिया की तरह हो, जहां उनके लिए जमीन कम पड़ गई है। ऐसा न हो कि आजादी ढूंढते-ढूंढते हमारे यहां भी अंधे तथा अपाहिजों की फौज खड़ी हो जाए और उनके लिए जगह कम पड़ जाए।
पाक का रवैया नहीं रहा ठीक
प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती
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उन्होंने कहा कि कश्मीर हिंसा के पीछे पाक का रवैया ठीक नहीं रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शपथग्रहण समारोह में पाक पीएम नवाज शरीफ को बुलाया। खुद लाहौर भी गए। इसके बाद पठानकोट हमला हो गया। फिर भी गृह मंत्री राजनाथ सिंह सार्क सम्मेलन में गए, लेकिन पाक का रिस्पांस अच्छा नहीं रहा।
वाजपेयी की नीतियों को अपनाना होगा
महबूबा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात में भी उन्होंने कहा था कि यदि कश्मीर में खूनखराबा रोकना है तो पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की नीतियों को अपनाना होगा। पाकिस्तान, भारत तथा कश्मीर को साथ मिलकर इस मसले का समाधान निकालना होगा।
वाजपेयी के समय में कोशिश की गई थी, लेकिन बदकिस्मती से वाजपेयी की दोबारा सरकार नहीं आई। यूपीए के समय में कश्मीर समस्या को लेकर प्रयास हुए, लेकिन वह नाकाफी थे।