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'बिल्ली की मिसाल दी तो मुसलमानों को आतंकवादी कहने का हौवा खड़ा कर दिया'

Tue, 31 May 2016 09:15 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
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व‌िधानसभा में बोलतीं महबूबा मुफ्ती - फोटो : Nikhil Mehta
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने घाटी में कश्मीरी पंडितों की ससम्मान वापसी के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए दोहराया है कि उनके लिए ट्रांजिट कालोनी का निर्माण कराया जाएगा। इन कालोनियों में 50 फीसदी कश्मीरी पंडित रहेंगे और शेष अन्य लोग। कोई भी इस कालोनी में रह सकता है। कश्मीरी पंडित यहां मिल जुलकर रहेंगे। 
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हालात ठीक होने पर वे अपने गांवों में चले जाएंगे। अभी गांवों में हालात सामान्य नहीं हैं। ऐसे में उन्हें छोड़ा नहीं जा सकता है।  उन्होंने मिसाल दी थी कि कबूतर को बिल्ली के आगे नहीं छोड़ा नहीं जा सकता है। इसको लेकर हंगामा शुरू हो गया। उलटा अर्थ निकाला गया। लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि कश्मीरी मुसलमान को बिल्ली बना दिया। 

सभी कश्मीरी  मुसलमानों को आतंकवादी बना दिया गया।  उन्होंने कहा कि ऐसे भ्रामक प्रचार से बचना चाहिए। आखिर कश्मीरी पंडितों को डर किस बात का है? राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद चर्चा के दौरान विधान परिषद में उन्होंने कहा कि नेकां-कांग्रेस के कार्यकर्ता भी गांवों से आकर शहरों में रह रहे हैं। उन्हें यहां सुरक्षा मुहैया कराई गई है।  क्यों नहीं उनसे कहा जाता कि वे गांवों में चले जाएं। इसलिए नहीं कहा जाता क्योंकि वहां रहना सुरक्षित नहीं है। 
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उन्होंने कहा कि एजेंडा आफ एलायंस को लेकर भी विपक्ष हंगामा करता है। जबकि पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में वर्किंग ग्रुप जिसमें नेकां, कांग्रेस, पीडीपी, पैंथर्स सभी शामिल थीं, ने सेना से भूमि वापसी, पावर प्रोजेक्ट की वापसी, अनुच्छेद 370 को बरकार रखने पर सहमति दी है। हालात सामान्य होने पर अफस्पा हटाने की बात कही गई है। इस पर सभी दलों के हस्ताक्षर हैं। एजेंडा आफ एलायंस में भी यह सारे विषय हैं।

उन्होंने कहा कि सुचेतगढ़ तथा अन्य रास्ते खुलेंगे तो यहां से बासमती और हार्डवेयर के पार्ट्स जाएंगे और वहां से पैसा आएगा। इससे रियासत में खुशहाली का रास्ता खुलेगा। प्रधानमंत्री मोदी की ओर इशारा करते हुए कहा कि एतबार है कि एक लीडर है जो जम्मू कश्मीर को मुसीबत से निकालने के लिए पाक से बात कर सकता है। 

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर हमला करते हुए कहा कि उमर ने जब दिल्ली को ज्वाइन किया था तो उस समय भी भाजपा की हुकूमत थी। आखिर उन्हें कौन सा आश्वासन मिला था। आप क्यों भाजपा के साथ गए थे? उन्होंने कहा कि आरएसएस की विचारधारा को लेकर भी बातें की जाती हैं। 

'राज्य के विशेष दर्जे से किसी प्रकार का समझौता नहीं'

व‌िधानसभा की कार्रवाई के दौरान मौजूद सीएम और ड‌िप्टी सीएम - फोटो : Amar Ujala
किसी भी विचारधारा को कश्मीरियत कैसे स्वीकार कर सकता है। अपने जड़ पर विश्वास करें। कहा कि पावर प्रोजेक्ट की वापसी के लिए थोड़ा समय दे दें, सकारात्मक परिणाम देखने कोे मिलेंगे। विपक्ष पर हमले करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ गठबंधन का फैसला आसान नहीं था। चुनाव में मिले जनमत का सम्मान करते हुए ही मुफ्ती ने भाजपा के साथ हाथ मिलाया। 

विपक्ष तो 1987 दोहराना चाहता था जब जनमत की हत्या की गई थी। जम्मू में भाजपा को जनमत मिला था, इसे कैसे नजरअंदाज किया जा सकता था। नेकां और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाने की बात कही थी। यदि यह हो जाता तो क्या कुर्सी की खातिर जम्मू के लोगों को नकारा नहीं जाता। मुफ्ती साहब जम्मू और कश्मीर को लड़ाना नहीं चाहते थे और न ही हिंदू और मुसलमान के नाम पर सरकार बनाना चाहते थे। 

उन्होंने कहा कि मुफ्ती के नेतृत्व में 2002 की सरकार काफी कामयाब थी। शांति प्रक्रिया की बहाली हुई थी, लेकिन 2005 के बाद यह प्रक्रिया थम गई। इसे फिर से बढ़ाने की जरूरत है। जम्मू-कश्मीर को खूनखराबे के रास्ते से विकास के पथ पर ले जाना है तो यही एक रास्ता है। सैनिक कालोनी के मद्दे पर कहा कि यह कालोनी केवल स्टेट सब्जेक्ट वालों के लिए होगा। राज्य के विशेष दर्जे से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता है।  

सबसे पहले जम्मू में 1964 में सैनिक कालोनी बनी। यह केवल स्टेट सब्जेक्ट वालों के लिए था। बाद में वर्ष 2011, 2012 व 2014 में भी बैठक हुई। उमर खुद इसमें शामिल हुए। हर बैठक में इसके लिए भूमि चिह्नित करने की बात कही गई, लेकिन कोई फैसला नहीं हुआ। उनके कार्यकाल में 21 अप्रैल को बैठक हुई जिसमें वे शामिल नहीं हुईं। 

18 मई को डिवकाम ने इस मुद्दे पर कह दिया कि श्रीनगर, पुलवामा, बडगाम में इसके लिए जमीन उपलब्ध नहीं है। अनावश्यक रूप से इस मुद्दे पर भ्रम फैलाने की कोशिश की गई।  उन्होंने कहा कि दो एम्स के मुद्दे पर भी हंगामा किया गया, लेकिन 26 मई को विजयपुर व अवंतिपोरा में एम्स खोलने का केंद्र सरकार का पत्र आ चुका है। 

इंडस्ट्रियल पालिसी को भी लेकर हंगामा किया गया। अब नीट मसले पर हो हल्ला मचाया जा रहा है। कहा जाता है कि राज्य सरकार ने अनुच्छेद 370 को कमजोर कर दिया। वस्तुस्थिति यह है कि राज्य में मेडिकल शिक्षा एमसीआई के दायरे में है। नीट भी एमसीआई के तहत ही है तो ऐसे में 370 कैसे कमजोर हो गया। 

वैसे भी यह साफ है कि राज्य के विशेष दर्जे पर नीट से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। दाखिला स्टेट सब्जेक्ट वालों का ही होगा। इस मामले में किसी प्रकार की चिंता करने की जरूरत नहीं है।
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जुमे मुबारक को जुमे पत्थर बना दिया

जम्मू-कश्मीर व‌िधानसभा - फोटो : Nikhil Mehta
उन्होंने कहा कि रियासत की दोनों राजधानियां जम्मू और श्रीनगर स्मार्ट श्रेणी बनेंगी। इसके लिए डीपीआर बनाने को पैसा जारी कर दिया गया है। अखिल भारतीय प्रतियोगिता के लिए दोनों शहरों को शामिल कर लिया गया है। पहले केवल एक शहर को शामिल किया गया था। यह प्रक्रिया का हिस्सा है। उम्मीद है कि दोनों शहर  स्मार्ट सिटी बनेंगे। 

एनएफएसए को लेकर भी हंगामा मचाया जाता है, जबकि इस पर भी पूर्ववर्ती सरकार ने ही दस्तखत किए हैं। वर्ष 2014 में चुनाव के डर से शायद वह इसे लागू नहीं कर पाई। इसके तहत लोगों को राशन मुहैया कराने के लिए मुफ्ती मोहम्मद सईद के नाम पर स्कीम शुरू की गई है। उम्मीद है कि पहली जुलाई से यह योजना शुरू हो जाएगी।


महबूबा ने कहा कि पहले लोगों को जुमे का इंतजार रहता था। अब इसे जुमे पत्थर बनाकर रख दिया गया।  मस्जिदों से पत्थरबाजी होती है। लोग मस्जिदों में नमाज पढ़ने जाने से कतराने लगे हैं कि पता नहीं कहां से पत्थर आए और वे इसका निशाना बन जाएं। कहा कि लोग उन्हें एंटी कश्मीरी कहते हैं। कश्मीरियत तो आपस में मिलकर रहने की बात करता है और यही इस्लाम भी है। हम मुस्लिम बहुल राज्य है। आपस में मिल जुलकर  रहें तो पूरे विश्व को इस्लाम का संदेश भी दे सकते हैं।

कुर्सी पर गोंद चिपकाकर बैठने का शौक नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुर्सी पर गोंद चिपकाकर उन्हें बैठने का शौक नहीं है। भाई बहन ने पिता की बात याद दिलाई तो वह इस कुर्सी पर हैं। अब जब तक यहां हैं तो एजेंडा आफ एलायंस के साथ इंसाफ करेंगी। उनकी जिंदगी का एजेंडा पिता को खुश रखना है। पिता उन्हें डाक्टर बनाना चाहते थे, लेकिन नहीं बन पाईं। उन दिनों आवारागर्दी ज्यादा करती थी। चुनाव भी उन्होंने पिता को खुश करने की खातिर लड़े। मेरे चुनाव जीतने पर वे खुश हो जाते थे।
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