महबूबा मुफ्ती के ट्वीट पर पूर्व मुख्यमंत्री व नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने तंज कसा है। ट्वीट कर कहा कि महबूबा सरकार ने मन्नान वानी को घेरने तथा उसे मारने की कई बार कोशिशें की हैं। मारे गए कश्मीरी आतंकियों के लिए उनके घड़ियाली आंसू व झूठी संवेदना कुछ साल पहले तक काम करते थे, लेकिन अब नहीं करेंगे। वह यूनिफाइड कमांड की प्रमुख रही हैं, जिन्होंने सुरक्षा बलों को आपरेशन आल आउट के लिए निर्देशित किया।
2016 में युवा प्रदर्शनकारियों की मौत पर तर्क देते हुए कहा था कि वे घरों से बाहर दूध या टॉफी लेने नहीं निकले थे। एक अन्य ट्वीट में कहा कि महबूबा मुफ्ती की यादाश्त कितनी कमजोर है। वह भूल गई कि वह अपने पूरे कार्यकाल में सभी मामलों की आर्किटेक्ट और लाभान्वित होने वाली रही हैं। वह इस स्थिति में नहीं हैं कि हिंसा के दुष्चक्र के लिए किसी और को जिम्मेदार ठहरा सकें।
मन्नान के पिता बोले, शोक जाहिर करना अपराध नहीं
रिसर्च स्कॉलर से हिजबुल कमांडर बने मन्नान वानी के पिता बशीर अहमद वानी ने मन्नान के लिए प्रार्थना करने पर एएमयू में हिरासत में लिए गए 25 लोगों को रिहा करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि मानवता के नाते इन्हें छोड़ा जाना चाहिए क्योंकि दुख की इस घड़ी में उन्होंने केवल शोक जाहिर करने के लिए ऐसा किया था। यह कोई अपराध नहीं है। पकड़े गए लोगों में पांच डाक्टर और कुछ इंजीनियरिंग के छात्र हैं जो दक्षिणी कश्मीर, बडगाम व कुपवाड़ा से जुड़े हैं।
एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और प्रबंधन से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में तीन कश्मीरी छात्रों के खिलाफ देशद्रोह का मामला सुलझाने की मांग की है।ओवैसी ने कहा कि कश्मीरी छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखनी चाहिए। यह राष्ट्रहित और कश्मीर के हित में होगा कि वे अपनी पढ़ाई पूरी करें।
हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि एएमयू के उपकुलपति, वहां के शिक्षक और गृहमंत्री गृह मंत्रालय में बैठकर इस मसले को सुलझा लेंगे।’ उन्होंने यह भी कहा कि इस मसले को जरूरत से ज्यादा तूल दिया गया।
कश्मीरी छात्रों ने सोमवार को एएमयू के तीन छात्रों पर देशद्रोह के मुकदमे और स्थानीय अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर परेशान करने के खिलाफ विरोध मार्च निकाला। भारत विरोधी नारे लगाने पर शनिवार को तीनों छात्रों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया था।