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कश्मीर में 10 हजार जवानों की तैनाती पर महबूबा बोलीं, लोगों में पैदा हो रहा है डर

Sat, 27 Jul 2019 02:38 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती - फोटो : फाइल, अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर में सुरक्षाबलों की 100 कंपनियां बढ़ाने के केंद्र के फैसले का विरोध जताया है। महबूबा ने ट्वीट कर कहा है कि 'घाटी में 10 हजार सैनिकों को तैनात करने के केंद्र के फैसले ने लोगों में भय पैदा कर दिया है। कश्मीर में सुरक्षा बलों की कोई कमी नहीं है। जम्मू-कश्मीर एक राजनीतिक समस्या है जो सैन्य साधनों से हल नहीं होगी। केंद्र सरकार को अपनी नीति पर पुनर्विचार और सुधार करने की आवश्यकता है।'

 

आपको बता दें कि एनएसए अजीत डोभाल के घाटी के सीक्रेट मिशन पर आने के तत्काल बाद कश्मीर घाटी में सुरक्षाबलों की 100 अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती की गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती को मंजूरी दी है। कुछ कंपनियां कश्मीर पहुंच गईं हैं। अन्य कंपनियां जल्द से जल्द घाटी पहुंचेंगी। 

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आदेश के अनुसार, इन 100 कंपनियों में सीआरपीएफ की 50, बीएसएफ-10, एसएसबी-30 और आईटीबीपी की 10 कंपनियां है। हर एक कंपनी में 90 से 100 कर्मी मौजूद रहते हैं। सीआरपीएफ की आने वाली 50 कंपनियों में से नौ कंपनियां दिल्ली में संसदीय चुनाव और कांवड़िया ड्यूटी के लिए लगी हुई हैं। इनकी जगह बीएसएफ की 9 कंपनियां लगाई गई हैं। इस तरह से सुरक्षाबलों की 100 अतिरिक्त कंपनियों को कश्मीर भेजने के पीछे कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। 

सूत्रों का कहना है कि कश्मीर में आतंकवाद से लड़ने और कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सुरक्षाबलों की अतिरिक्त कंपनियां भेजे जाने को मंजूरी दी गई है। राज्य पुलिस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से अतिरिक्त कंपनियों की मांग की थी। इस मंजूरी से संबंधित एक आदेश सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।

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35ए को हटाने की चर्चा

सूत्रों का कहना है कि, अमरनाथ यात्रा की समाप्ति के बाद केंद्र सरकार अनुच्छेद 35ए पर फैसला ले सकती है। तब तक संसद का सत्र भी समाप्त हो जाएगा। बताया जा रहा है कि अनुच्छेद 35ए को राष्ट्रपति के आदेश के तहत रियासत में लागू किया गया था। इसलिए इसे राष्ट्रपति के आदेश से समाप्त किया जा सकता है। इसे हटाने के बाद घाटी में व्यापक पैमाने पर हिंसा का खतरा है। ऐसे में कानून-व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त फोर्स की तैनाती का फैसला किया गया है। दरअसल अनुच्छेद 35ए के जरिये यहां के निवासियों को स्टेट सब्जेक्ट मिलता है।

यह अनुच्छेद गैर रियासती लोगों को राज्य में अचल संपत्ति खरीदने, स्थायी तौर पर बसने और राज्य सरकार के अधीन किसी विभाग में नौकरी के अधिकार से वंचित करता है। यह अनुच्छेद राज्य विधानसभा को यहां के नागरिकों के लिए राज्य की स्थायी नागरिकता, उनके लिए राज्य सरकार के अधीनस्थ नौकरियां व अन्य विशेषाधिकारों को यकीनी बनाने का अधिकार देता है। इस अनुच्छेद को समाप्त करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में कई जनहित याचिकाएं भी विचाराधीन हैं।

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डीजीपी बोले, रूटीन प्रक्रिया है

डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती एक रूटीन प्रक्रिया है। कश्मीर में ट्रेनिंग करने वाली कंपनियों को राहत देने के लिए ऐसा किया गया है। पंचायत चुनाव के बाद से ही यह चल रहा है।

सीक्रेट मिशन पर डोभाल के पहुंचने से चर्चा हो गई थी शुरू

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल सीक्रेट मिशन के तहत घाटी के दौरे पर बुधवार को श्रीनगर पहुंचे थे। श्रीनगर पहुंचने पर उन्होंने सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों के आला अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें कर घाटी के मौजूदा हालात तथा सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी हासिल की थी। दौरे को टॉप सीक्रेट रखा गया था और श्रीनगर पहुंचने से कुछ देर पहले ही संबंधित अधिकारियों को जानकारी देकर बैठक के बारे में बताया गया।

एनएसए ने राज्यपाल के सलाहकार के विजय कुमार, मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम, डीजीपी दिलबाग सिंह, आईजी एसपी पाणि से मुलाकात की थी। उनके साथ दिल्ली से आईबी के एक आला अधिकारी भी आए थे। उनके सीक्रेट मिशन पर घाटी में आने की चर्चा आम हुई तो अनुच्छेद 35ए व 370 को हटाए जाने को लेकर अटकलें तेज हो गईं। चर्चा की जा रही है कि इसे हटाने से पहले वे सुरक्षा व्यवस्था की स्थितियों का जायजा लेने के लिए पहुंचे थे। 

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