भाजपा और पीडीपी के बीच विश्वास का संकट समाप्त करने की कोशिश तेज हो गई है। इसी क्रम में आज पीडीपी अध्यक्षा महबूबा मुफ्ती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह जम्मू कश्मीर में सरकार गठन में बड़ा कदम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर बाहर निकली महबूबा मुफ्ती काफी संतुष्ट नजर आयी। मुलाकात के बाद पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने मीडिया से कहा,'वजीर-ए-आजम से मिलकर मुतमईन हूं।' महबूबा ने कहा कि, पीएम मोदी से मुलाकात सकारात्मक रही और मैं श्रीनगर वापस जाकर अगला कदम उठाउंगीं।
महबूबा मुफ्ती ने कहा, 'रियासत की जनता के हित में दोनों पार्टियां एकजुट हैं। पीडीपी सूत्रों के मुताबिक, मोदी से मुलाकात के दौरान महबूबा ने सभी मामलों में खुलकर बात की है और सरकार बनाने की राह में आ रही मुश्किलें लगभग सुलझ गई हैं।
जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने पर फैसला गुरुवार को पार्टी सदस्यों से मुलाकात के बाद लिया जाएगा। भाजपा के सख्त रुख के बाद गतिरोध दूर करने के लिए पीडीपी ने नरम रवैया अपना लिया है। पीडीपी की ओर से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को संदेश भेजा गया है कि पार्टी ने कोई नई शर्त नहीं रखी है।
पीडीपी ने गठबंधन एजेंडा में मौजूद कुछ बिंदुओं के मामले में इन्हें पूरा करने के लिए समय सीमा तय करने की बात कही थी। इस बीच, भाजपा ने गठबंधन एजेंडा पर कायम रहने का संकेत देकर सरकार गठन की नई उम्मीदें जगा दी हैं।
महबूबा मुफ्ती तीन-चार दिनों तक दिल्ली में रहेंगी
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पीडीपी के सूत्रों के मुताबिक महबूबा मुफ्ती तीन-चार दिनों तक दिल्ली में रहेंगी। इस बीच, उनकी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से फिर से मुलाकात हो सकती है। शाह से पिछली मुलाकात के बाद वार्ता टूट गई थी।
भाजपा महासचिव राम माधव ने पीडीपी की नई शर्तें नहीं मानने का एलान कर दिया था। इस कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से महबूबा मुफ्ती के मुलाकात के तय कार्यक्रम को भी रद्द कर दिया गया था।
पीडीपी नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री डॉ. हसीब द्राबू भी सोमवार को दिल्ली पहुंचे थे। उनके साथ मुफ्ती मोहम्मद सईद के पूर्व राजनीतिक सलाहकार वहीद उर्र रहमान पारा भी दिल्ली आए हैं।
मुलाकात में सरकार गठन के गतिरोध को समाप्त करने का फार्मूला तय करने की कोशिश
पीडीपी अध्यक्षा महबूबा मुफ्ती
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सूत्रों के मुताबिक पहले द्राबू और राम माधव की मुलाकात में सरकार गठन के गतिरोध को समाप्त करने का फार्मूला तय करने की कोशिश होगी। दोनों नेताओं में अच्छी ट्यूनिंग रही है। पिछली बार इन दोनों ने ही दो विपरीत ध्रुव के दलों के बीच गठबंधन की पटकथा रची थी।
इस बार अगर दोनों नेता सर्वमान्य फार्मूला तय करने में सफल रहते हैं तो महबूबा की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात संभव हो सकेगी। पीडीपी की ओर से अब लचीला रुख अपनाए जाने के संकेत हैं। पीडीपी के सामने दिक्कत यह है कि उसके ज्यादातर विधायक फिलहाल चुनाव का सामना नहीं करना चाहते हैं।
भाजपा भी चुनाव टालना चाहती है। विचारों की इस समानता ने एक बार फिर से वार्ता के द्वार खोल दिए हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गठबंधन एजेंडा के प्रति भाजपा की पूर्ण प्रतिबद्धता की बात कहकर वार्ता के लिए अनुकूल माहौल बनाया है। नतीजतन पुराने एजेंडे पर बिना किसी शर्त के सरकार गठन की संभावना फिर से पैदा हुई है।