सीमावर्ती लोगों की मांग पर चार साल पहले प्रशासन ने मंजूर किया था सरकारी डिग्री कॉलेज
आज तक चिह्नित नहीं हुई भूमि, 10 किमी दूर कमाला में एक सरकारी इमारत में चल रहा कॉलेज
तहसीलदार बोले- रामगढ़ में सरकारी भूमि नहीं, लोगों ने कहा- सरकारी भूमि को कमी नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
रामगढ़। सीमावर्ती क्षेत्र रामगढ़ में करीब चार वर्ष पहले मंजूर हुआ सरकारी डिग्री कॉलेज वहां से करीब 10 किमी दूर कमाला इलाके में चल रहा है। लोग लगातार मांग कर रहे हैं कि प्रशासन उस कॉलेज को रामगढ़ में ही बनाए, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। इस पर तहसीलदार का कहना है कि उन्हें रामगढ़ में सरकारी भूमि नहीं मिल रही। जबकि, स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि रामगढ़ में सरकारी भूमि की कोई कमी ही नहीं है।
इस मुद्दे को लेकर सोमवार को स्वांखा में विभिन्न राजनीतिक दलों, बीडीसी चेयरमैन, डीडीसी सदस्य, सरपंचों व पंचों के साथ तहसीलदार रामगढ़ ने बैठक की। बैठक में बीडीसी चेयरमैन दर्शन सिंह ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए काफी दूर जाना पड़ता है। इसलिए, प्रशासन सही जगह चिह्नित कर जल्द कॉलेज को बनाया जाए। डीडीसी सदस्य अनीता चौधरी बोलीं कि प्रशासन सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों के साथ खिलवाड़ कर रहा है। 2019 में क्षेत्र के बच्चों के लिए ही रामगढ़ में डिग्री कॉलेज मंजूर हुआ था। लेकिन, आज तक प्रशासन 28 कनाल भूमि चिह्नित नहीं कर पाया। यह एक सोची समझी साजिश है। लोग इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे।
सरपंच रूप चौधरी ने कहा कि डिग्री कॉलेज रामगढ़ में ही मंजूर हुआ है, और उसे रामगढ़ में ही बनना चाहिए। सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों की यह बहुत पुरानी मांग है। पंच मोहन सिंह भट्टी ने कहा कि रामगढ़ क्षेत्र में काफी सरकारी भूमि है। प्रशासन चाहे तो कहीं भी डिग्री कॉलेज बना सकता है। लेकिन, इसके पीछे कोई और बात दिखाई दे रही है। सरपंच जगदीश भट्टी ने कहा कि उनकी पंचायत में भी काफी सरकारी भूमि है, जहां कॉलेज बनाया जा सकता है। लेकिन, साफ नजर आ रहा है कि रामगढ़ में डिग्री कॉलेज को लेकर भूमि पर ही समय बर्बाद किया जा रहा है। बैठक में पंच बिल्लू चौधरी, पंच भगवान चौधरी, भाजपा नेता बिंद्र सिंह बूटी राम, पंच लाड़ी सिंह, भाजपा नेता टोनी चौधरी, आदि ने भी अपने विचार रखे।
15 किमी दूर पढ़ने जाते हैं विद्यार्थी
सीमावर्ती गांव अबताल, छावनी के छात्र शिवानी, दीपक कुमार, संजय चौधरी, प्रियंका कुमारी, आदि का कहना है कि उन्हें अपने गांव से 15 किमी दूर कमाला में पढ़ने जाना पड़ता है। इसके लिए तीन वाहन बदलने पड़ते हैं, और अधिक धन व समय की बर्बादी होती है। यदि रामगढ़ में सरकारी डिग्री कॉलेज खुल जाए तो उनके समय व धन की भी बचत होगी। वहीं, सीमावर्ती क्षेत्र के छात्रों को भी राहत मिलेगी।
रामगढ़ क्षेत्र में हमें 40 कनाल सरकारी भूमि की जरूरत है। लेकिन, इतनी भूमि हमें इकट्ठी नहीं मिल रही है। पता चला है कि मालशा और नर्सरी में सरकारी भूमि है। अब वहां जाकर देखा जाएगा कि एक स्थान पर 40 कनाल भूमि है या नहीं।
- फारूक हुसैन, तहसीलदार, रामगढ़