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J&K: राम माधव और महबूबा मुफ्ती के संवाद से खत्म हुए मतभेद

Tue, 13 Dec 2016 12:41 PM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू
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Ram MAdhav - फोटो : File Photo
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भाजपा और पीडीपी की के बीच चल रही खींचतान को समाप्त करने के लिए नया फार्मूला बनाया जा रहा है। भाजपा महासचिव राम माधव और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के बीच फोनपर हुई बात के बाद विवाद के मुद्दों को आपसी बातचीत से सुलझाने पर सहमति बन गई है।
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वित्त मंत्री डॉ. हसीब द्राबू की अध्यक्षता वाला कैबिनेट ग्रुप कश्मीर पुलिस सर्विस के अधिकारियों के कैडर पुनर्गठन पर जारी विवाद के हल का फार्मूला तय कर रहा है। विवाद के अन्य मुद्दों को सुलझाने के लिए गठबंधन की समन्वय समिति की नियमित बैठकों का सिलसिला फिर शुरू करने पर भी दोनों दल सहमत हो गए हैं।  

कैबिनेट की बैठक में भाजपा के मंत्रियों के विरोध के कारण मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती नाराज होकर बैठक छोड़कर अपने आवास पर चली गईं थीं। उसके बाद भाजपा की ओर से सुलह की कोशिशें तेज हुईं। मुख्यमंत्री द्वारा कैबिनेट बैठक का बहिष्कार करने से दोनों दलों के बीच तनाव बढ़ा।अफसरों के तबादले और पदस्थापना के मुद्दे कैबिनेट में लाने से पहले आपसी चर्चा पर भी सहमति बनी है। 
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राम माधव ने निकाला सुलह का फार्मूला

राम माधव - फोटो : Amar Ujala
भाजपा सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने भाजपा के प्रदेश स्तरीय नेताओं के सुझाव को पूरी तरह नकार दिया। इस कारण सुलह की स्थिति नहीं बन पा रही थी। बाद में भाजपा ने केपीएस अधिकारियों की सेवाओं को पुनर्गठित करने के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट की।

फिर भाजपा महासचिव और जम्मू-कश्मीर के प्रभारी राम माधव ने महबूबा से सीधी बात कर सुलह का फार्मूला निकाला। नए फार्मूले में जम्मू और श्रीनगर के आईजी के पद आईपीएस के लिए ही सुरक्षित रहेंगे।

लेकिन, पुलिस विभाग से जुड़े अभियोजन निदेशालय और अन्य पदों पर केपीएस अफसरों को आईजी-डीआईजी के रूप में पदस्थापित करने का रास्ता निकाला जाना संभव है। गृह विभाग के कैबिनेट प्रस्ताव में केपीएस अफसरों के लिए आईजी और डीआईजी जैसे वरीय पद आरक्षित करने की बात कही गई है।

वर्तमान में कश्मीर एडमिस्ट्रेटिव सर्विस ( केएएस) के अफसर सेक्रेटरी स्तर तक पहुंच जाते हैं, लेकिन, केपीएस अफसर एसएसपी पद तक सीमित रहते हैं। 
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