शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस (सिक्मस) के डाक्टरों को दो टूक फरमान जारी करते हुए मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कहा है कि या तो निजी प्रैक्टिस चुनें या फिर स्किमस को। यदि यहां तैनात डाक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध है, तो इस पर सख्ती से अमल होगा। इस पर सख्ती से नजर भी रखी जाएगी। बुधवार को स्किमस की गवर्निंग बॉडी की बैठक लेते हुए मुफ्ती ने यह आदेश अधिकारियों को दिए।
बैठक में वित्त मंत्री हसीब द्राबु, स्वास्थ्य मंत्री लाल सिंह, राज्य स्वास्थ्य मंत्री आसिया नक्श, मुख्य सचिव इकबाल खांडे और विभाग के आयुक्त सचिव भी मौजूद थे। सीएम ने अधिकारियों से कहा कि स्किमस में दिल्ली के एम्स की तरह सुविधाएं हैं और यहां पर फैकल्टी भी है। इसलिए इसे एम्स की तरह प्रभावी बनाना होगा। इसके लिए सभी डाक्टरों को मौजूद रहना होगा।
ऐसा तब ही संभव होगा, जब डाक्टर निजी प्रैक्टिस नहीं करेंगे। यहां आने वाले किसी मरीज को चंडीगढ़ के पीजीआई या फिर दिल्ली के एम्स नहीं जाना पड़े। जो मरीज जाते हैं, उन्हें लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। कई गरीब मरीजों को भी जाना पड़ता है। स्किमस के ढांचे का इस्तेमाल करने की आवश्यकता है, लेकिन उनके पास पैसे नहीं होते।
राज्य के उप जिला और जिला स्तर के अस्पतालों में भी सुविधाएं मजबूत करने पर बल दिया गया है। स्किमस के रीजनल कैंसर सेंटर के डाक्टर शौकत जरगर ने बताया कि कैंसर संस्थान के लिए 120 करोड़ के अनुदान की मंजूरी मिली है। इसमें से पहली किस्त का 47 करोड़ बहुत जल्द जारी होगा।