फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jammu News: नए कॉलेजों में मेडिकल बोर्ड नहीं, दिव्यांग प्रमाणपत्र के लिए साइकाइटरी अस्पताल में जाने को मजबूर पीड़ित

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

जम्मू। संभाग के नए राजकीय मेडिकल कॉलेजों में मनोचिकित्सकों की भर्ती हो रही है, लेकिन जिला स्तर पर दिव्यांग मेडिकल बोर्ड बनाने की पहल नहीं की गई। नतीजतन, दिव्यांग प्रमाणपत्र के लिए जिला स्तर से पीड़ितों के साथ तीमारदारों को साइकाइटरी अस्पताल जम्मू आना पड़ रहा है। संभाग स्तर पर इसी अस्पताल में मेडिकल बोर्ड बनाया जाता है, जिससे पीड़ितों पर आर्थिक बोझ के साथ-साथ समय की बर्बादी हो रही है।
संभाग के दस जिलों में मौजूदा साइकाइटरी अस्पताल जम्मू में ही एकमात्र साइकाइटरी मेडिकल बोर्ड है। नियमों के तहत बोर्ड के लिए मनोचिकित्सक, चिकित्सा अधीक्षक और फिजिशियन होना चाहिए, जो नए मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध है। मेडिकल कॉलेज डोडा, उधमपुर, कठुआ में मनोचिकित्सक हैं, जबकि राजोरी में रजिस्ट्रार है और अन्य मनोचिकित्सक की नियुक्ति हुई है। जिला स्तर से आने वाले पीड़ितों को दिव्यांग प्रमाणपत्र के लिए कई महीने लग रहे हैं और इस प्रक्रिया में कई बार जम्मू का चक्कर लगाना पड़ता है। साइकाइटरी अस्पताल में प्रत्येक मंगलवार को मेडिकल बोर्ड बिठाया जाता है जिसमें दर्जनों मानसिक रोगियों की जांच की जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

नौंवी बार आईं तो कोई तीन महीने से संघर्ष कर रहीं
मेडिकल बोर्ड के लिए 65 वर्षीय मरीज को लेकर पहुंचीं सांबा की सुरजीत कौर ने बताया कि सांबा में ही मेडिकल बोर्ड बन जाए तो जम्मू के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। खासतौर पर उम्रदराज लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। मजालता से दिव्यांग प्रमाणपत्र के नवीकरण के लिए पहुंचीं कैलाश देवी ने बताया कि भाई काे मानसिक समस्या है, नौंवी बार बच्चों को छोड़कर आना पड़ा। हर बार चक्कर संघर्ष करना पड़ रहा है। मरीज को लेकर पहुंचीं सुनीता निवासी बरमीन उधमपुर ने बताया कि तीन माह से परेशान हैं। उनका निवास उधमपुर जिला मुख्यालय से भी 70 किमी दूर पहाड़ी क्षेत्र में है। अगर उधमपुर में मेडिकल बोर्ड बन जाए तो सुविधा रहेगी। 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता पर पेंशन का लाभ मिलता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें