जम्मू रेलवे स्टेशन पर मैटाडोर नहीं चलने से परेशान यात्री
- फोटो : संजय कुमार
जम्मू में मेटाडोर और अन्य यात्री वाहन आज से नहीं चलेंगे। अंतर जिला रूट पर बसें भी बंद रहेंगी। वाहनों में 50 प्रतिशत यात्री ले जाने के प्रशासनिक आदेश के खिलाफ ट्रांसपोर्टर उतर आए हैं। ऑल जम्मू-कश्मीर ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन ने प्रशासन के इस आदेश के खिलाफ हड़ताल पर जाने का फैसला लिया है। एसोसिएशन ने कहा कि सरकार ने 50 प्रतिशत यात्रियों के साथ ही परिचालन की अनुमति दी है। ऐसे में बिना 50 प्रतिशत यात्री किराया बढ़ाए वाहनों का परिचालन करना संभव नहीं है।
परिवहन आयुक्त को बुधवार से यात्री वाहन नहीं चलाने के फैसले से अवगत करा दिया गया है। प्रदेश सरकार ने सभी यात्री वाहनों को 50 प्रतिशत यात्रियों के साथ परिचालन करने का आदेश जारी किया है। ऑल जम्मू-कश्मीर ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन टीएस वजीर ने कहा कि सरकार को यह फैसला लेने सेे पहले ट्रांसपोर्टरों को विश्वास में लेना चाहिए था, लेकिन एसोसिएशन को बात रखने का मौका नहीं दिया गया। एसोसिएशन ने परिवहन आयुक्त को अपने फैसले से अवगत करवा दिया है। अगर सरकार 50 प्रतिशत तक किराया बढ़ाती है तो हम यात्री वाहनों का परिचालन शुरू करेंगे, नहीं तो हमारी हड़ताल जारी रहेगी।
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पिछले वर्ष भी कारोबार हो गया था खत्म
एसोसिएशन ने कहा कि पिछले वर्ष कोविड के कारण लगे लॉकडाउन से हमारा कारोबार खत्म हो गया है। जब तक सरकार ने 50 प्रतिशत यात्रियों के साथ परिचालन के आदेश को लागू रखना है, तब तक किराये में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी करनी चाहिए, ताकि हमारी आजीविका भी चलती रहती। शहर में मेटाडोर बंद होने से लॉकडाउन जैसे हालात पैदा हो जाएंगे। इस फैसले से श्रमिकों से लेकर नौकरी पेशा लोग प्रभावित होंगे। वहीं अंतर जिला रूट्स पर बसों केे नहीं चलने से लोग का रोजगार प्रभावित होगा।
आम यात्री प्रभावित होंगे
ट्रांसपोर्टरों के हड़ताल पर जाने से आम यात्री प्रभावित होंगे। जम्मू शहर में मेटाडोर लाइफलाइन है। कई लोग इधर-उधर जाने के लिए मेटाडोर पर ही निर्भर हैं। अगर मेटाडोर नहीं चलेंगी तो उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। विक्रम चौक पर मेटाडोर स्टापेज पर यात्री सुरेश ने बताया कि वह गांधी नगर में रहते हैं और जानीपुर में एक दुकान पर काम करते हैं।
रोजाना मेटाडोर से ही काम पर आते-जाते हैं। उनके पास अपना कोई वाहन नहीं है। अगर बुधवार से मेटाडोर नहीं चलेगी तो काम पर आना-जाना मुश्किल हो जाएगा। अगर सरकार 50 फीसदी किराया बढ़ा भी देती है तो इसका बोझ हमारी जेब पर पडे़गा। इसलिए सरकार को कोई बीच का रास्ता निकालना चाहिए ताकि न ट्रांसपोर्टरों को तंगी हो और न ही यात्रियों को।