दिल्ली में राष्ट्रपति के हाथों सम्मान पाने के बाद पेशे से शिक्षक महजबीन इन दिनों जम्मू में हैं। महजबीन ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि बच्चों-युवाओं को सही रास्ता दिखाने के उनके अभियान के रास्ते में कई दुश्वारियां भी हैं। कई लोग इसे गलत समझते हैं। इसके बावजूद वह अपने गांव तथा स्कूल के बच्चों को लगातार प्रेरित करती रहेंगी कि वे गलत रास्ते पर न जाएं। मन लगाकर पढ़ाई करें और अपना करियर बेहतर बनाएं। हिंसा के रास्ते पर चलने से कुछ नहीं मिलने वाला है।
भटके युवाओं के लिए आदर्श हैं नजीर
महजबीन का कहना है कि नजीर आतंक की राह पर भटके युवाओं के लिए आदर्श हैं। वह हमेशा राज्य में शांति बहाली के बारे में सोचा करते थे। राष्ट्र के प्रति उनके हृदय में काफी सम्मान था। यही वजह है कि वे आतंक का रास्ता छोड़कर सेना में शामिल हुए। उन्होंने सेना में रहते हुए कई चुनौतियों का सामना किया। वे दूसरे के लिए प्रेरणा स्रोत भी बने। वह एक बहादुर सैनिक थे। हमेशा चुनौतीपूर्ण मिशन के लिए तैयार रहते थे। कई मौकों पर जान को खतरे में डालकर कर्तव्य का निर्वहन किया।
अब सारा ध्यान परिवार पर
उनका कहना है कि अब उनका पूरा ध्यान मां-बाप, देवर-देवरानी तथा बच्चों पर है। दो बच्चे अतहर और शाहिद क्रमश: कक्षा 12 और नौ में पढ़ रहे हैं। छोटा बेटा शाहिद कोटा में तो अतहर श्रीनगर में पढ़ाई कर रहा है। मिडिल स्कूल में शिक्षक महजबीन बच्चों को कश्मीरी व उर्दू की शिक्षा देती हैं। आवश्यकतानुसार गणित भी पढ़ाती हैं।