आतंकी हमले में शहीद होने वाले जम्मू कश्मीर पुलिस के हेड कांस्टेबल राजिंदर कुमार उर्फ राजू ने अपने प्राणों की आहुति देकर कई लोगों की जान बचा ली।
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सम्मान के साथ ही अंतिम संस्कार
- फोटो : Amar Ujala
अगर इस हमले में राजू ने बहादुरी न दिखाई होती, तो शायद आतंकी दर्जनों लोगों की जान ले सकते थे, क्योंकि जिस स्थान पर आतंकी छिपे हुए थे, वहां से पुंछ ब्रिगेड मुख्यालय मात्र 100 मीटर की दूरी पर है। इसके साथ ही वहां से मात्र 200 मीटर की दूरी पर मोहल्ला पावर हाउस के शिव, दुर्गा भैरव मंदिर में बने गणपति पंडाल में रविवार को यज्ञ और भंडारे का आयोजन किया जा रहा था, जिसमें हजारों की संख्या में लोगों को भाग लेना था।
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'मां से कह गया कि अभी आता हूं'
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मुठभेड़ के दौरान मोर्चा संभाले सेना के जवान
- फोटो : Amar Ujala
इतना ही नहीं जिस स्थान पर राजिंदर कुमार शहीद हुए वहां से आधे घंटे के बाद सेना की टुकड़ी गुजरने वाली थी। ऐसे में अपनी शहादत से इस जांबाज सिपाही ने कई जानों को बचा लिया। राजौरी-पुंछ रेंज के डीआईजी जॉनी विलियम का कहना है कि हमें एक ओर अपने जवान की शहादत का गम हैं, तो वहीं दूसरी ओर उस पर फख्र भी है।
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दूसरी ओर वीर सिपाही के परिवार पर और रिश्तेदारों पर कहर टूट पड़ा है। तीन भाई बहनों में सबसे छोटा एवं लाडला होने के बावजूद राजिंदर ने अपने देश के लिए कुछ करने की चाहत में पुलिस सेवा में भर्ती हुआ।
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- फोटो : Amar Ujala
आतंकवाद के दौर में कई वर्षों तक जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल आपरेशन ग्रुप में काम करते हुए उन्होंने दर्जनों आतंकियों का सफाया किया। इसके बाद पुलिस सीआईडी में काम किया। राजिंदर कुमार शर्मा के परिवार में माता बसंत देवी, पत्नी अंजना शर्मा और बेटी अंशिका शर्मा रह गई हैं। उनके पिता की पहले ही मौत हो चुकी है।
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- फोटो : Amar Ujala
बेटे की शहादत पर मां का कहना है कि सुबह वह मेरे पास ही बिस्तर पर लेट कर अपनी बेटी से बातें कर रहा था कि तभी किसी का फोन आ गया और वह बाहर की तरफ जाने लगा। इस पर मैंने कहा कि नाश्ता करके जाना, तो वो कहने लगा कि अभी थोड़ी देर में आ कर नाश्ता करता हूं।
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- फोटो : Amar Ujala
उनकी मां ने आगे बताया कि 'उसके जाने के काफी समय बाद जब हमें आतंकी हमले का पता चला, तो हम उसे फोन करने लगे, लेकिन फोन उठ नहीं रहा था। करीब दो घंटों बाद जब उसे घटना स्थल से उठाया गया, तो हमें यही बताया गया कि वह घायल हुआ है, लेकिन आधे घंटे बाद हमें बताया गया कि हमारा राजू शहीद हो गया है।'
वहीं उसके पड़ोसियों और दोस्तों का कहना है कि अगर राजू ने वीरता नहीं दिखाई होती तो आतंकियों की लोकेशन का पता नहीं चल पाता और कई लोगों की जान जा सकती थी।