जम्मू । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात में पुलवामा के ओख गांव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पुलवामा की अपनी यह पहचान तब स्थापित हुई है जब यहां के लोगों ने कुछ नया करने की ठानी। काम को लेकर जोखिम उठाया और खुद को उसके प्रति समर्पित कर दिया। ऐसे ही कर्मठ लोगों में मंजूर अहमद अलाई हैं। पहले मंजूर लकड़ी काटने वाले एक सामान्य मजदूर थे। मंजूर भाई कुछ नया करना चाहते थे ताकि उनकी आने वाली पीढ़ियां गरीबी में ना जिए। उन्होंने अपनी पुस्तैनी जमीन बेच दी और सेब रखने वाले लकड़ी के बक्से बनाने की यूनिट शुरू की। वे अपने छोटे से व्यवसाय में जुटे हुए थे। तभी उन्हें कहीं से पता चला कि पेंसिल निर्माण में चिनार की लकड़ी का उपयोग शुरू किया गया है। ये जानकारी मिलने के बाद उन्होंने अपनी उद्यमिता का परिचय देते हुए कुछ प्रमुख पेंसिल निर्माण इकाइयों को चिनार के बक्शों की आपूर्ति शुरू की। उन्हें यह बहुत फ ायदेमंद लगा और उनकी आमदनी भी अच्छी खासी बढ़ने लगी। समय के साथ उन्होंने पेंसिल स्लेट निर्माण की मशीनरी ले ली। इसके बाद उन्होंने देश की बड़ी-बड़ी कंपनियों को पेंसिल स्लेट की आपूर्ति शुरू कर दी। आज उनके इस कारोबार का टर्नओवर करोड़ों में है। वे लगभग 200 लोगों को आजीविका भी दे रहे हैं।