पाकिस्तान द्वारा जिले के करमाड़ा क्षेत्र में रिहाइशी इलाकों को निशाना बना कर की गई भारी गोलाबारी से जहां इलाके के कई घरों को भारी नुकसान पहुंचा था। वहीं लोगों द्वारा जान जोखिम में डाल कर खेतों से मक्की की फसल को काटकर घर की छतों पर सूखने के लिए रखा गया था, जो अब खाने लायक नही रही।
पाकिस्तान की नापाक हरकत ने मक्की खाने लायक नहीं छोड़ी है। ग्रामीण नसीब बेगम, हाजरा बेगम, शहीद कोसर का कहना है कि मक्की में पाक गोलाबारी में गोलों के टुकड़े लगने और गांव में गिरे गोलों से मिट्टी कंकड़ आदि गिरने के साथ मक्की के दानों से बारूद की दुर्गंध आने लगी है।
खेतों में साल में सिर्फ एक ही मक्की की ही फसल होती है जो गोलाबारी से बरबाद हो गई है। फसल बर्बाद हो जाना हमारे लिए बड़ी परेशानी का सबब बन गया है। अब हम लोग खाएंगे क्या। क्योंकि मक्की की रोटी हमारे भोजन का अहम हिस्सा है।