हर पल होगी निगरानी:
प्रशासन के अनुसार पहली बार रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) तकनीक लागू होगी। हर श्रद्धालु को आरएफआईडी कार्ड दिया जाएगा जिससे उनकी लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी। इससे प्रशासन को पता चलता रहेगा कि यात्री कहां है। किसी स्थान पर श्रद्धालुओं की संख्या 5 से 6 हजार हो जाती है तो पुलिस यात्रियों को आगे जाने से रोकेगी ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना से बचा जा सके।
यात्रियों के ठहरने की होगी व्यवस्था:
प्रशासन का कहना है कि विभिन्न स्थानों पर यात्रियों के ठहरने के लिए पड़ाव बनाए जाएंगे। इन स्थानों व आसपास के क्षेत्रों में मांस, शराब व नशाखोरी पर प्रतिबंध रहेगा जिसके लिए आदेश जारी किया जाएगा। डीसी ने साफ-सफाई बनाए रखने के लिए स्थानीय लोगों से भी सहयोग मांगा है। उन्होंने कहा कि यात्रा को सफल बनाने में जनता की भूमिका बेहद अहम रहती है।
पिछले हादसे से सबक, सुरक्षा पर फोकस
पिछले साल 14 अगस्त को चिशोती में बादल फटने से कई जानें गई थीं। कई लोग लापता हो गए थे। इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन इस बार सतर्क है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। इसलिए यात्रियों को आरएफआईडी कार्ड दिए जाएंगे। वहीं प्रशासन के अनुसार यात्रा की शुरुआत स्थल किश्तवाड़ के सरकूट मंदिर में ठहरने की व्यवस्था भी की जाएगी। प्रशासन पानी, बिजली व अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर रहा है।