सीपीआई (एम) के प्रदेश सचिव एवं कुलगाम विधानसभा क्षेत्र से विधायक मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि कभी मन की बात तो कभी तन की बात करने वाले प्रधानमंत्री पिछले कई दिनों से जल रहे कश्मीर पर चुप क्यों हैं। उन्होंने कहा कश्मीर सैन्य या हिंदू-मुस्लिम नहीं, बल्कि सियासी मसला है।
जारी हिंसा को अब तक का सबसे कठिन दौर बताते हुए केंद्र से तत्काल संसदीय कमेटी को हालात का जायजा लेने के लिए भेजने और सभी हित धारकों जिसमें अलगाववादी भी शामिल हैं, से बातचीत पर जोर दिया है। तारिगामी ने कहा, ताकत के बल पर हालात को नजरअंदाज करने का प्रयास किया तो यह पूरे क्षेत्र के लिए खतरनाक होगा।
जम्मू में शनिवार को पत्रकार वार्ता में तारिगामी ने कहा कि पिछले 27 साल से कश्मीर में अस्थिरता का आलम है। इस बार जो हालात हैं, वे पिछले वर्षों से ज्यादा चिंताजनक हैं। केंद्र संसदीय कमेटी कश्मीर में भेजे और अलगाववादियों सहित सभी हितधारकों से बातचीत का दौर शुरू करे। यहां हजारों लोग जख्मी हो चुके और कई जानें जा चुकी हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने कश्मीर पर स्काई इज द लिमिट का नारा दिया था। इसके बाद वाजपेयी ने हर किसी से बातचीत शुरू की। 2010 में केंद्र में जो सरकार थी, उन्होंने हालात खराब होने पर वार्ता के लिए संसदीय दल को कश्मीर भेजा। तारिगामी ने कहा बातचीत के दरवाजे खोलने ही होंगे।
खराब हालात का लाभ उठा सकता है आईएस
कश्मीर में बिगड़े हालात में सुधार न आने पर पूछे सवाल के जवाब में तारिगामी ने कहा कि हालात खराब रहे तो पाकिस्तान लाभ लेने की कोशिश करेगा। आईएस जैसे संगठन भी हालात का लाभ उठा सकते हैं।