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उप राज्यपाल सिन्हा ने कहा : जम्मू-कश्मीर के विभाजन की अफवाह स्वार्थी तत्वों की साजिश

Sat, 12 Jun 2021 01:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

  • मनोज सिन्हा बोले, न कोई विचार हुआ, न चर्चा होने वाली है न होगी, जनता फिजूल बातों पर न दे ध्यान
  • परिसीमन पूरा होने पर विधानसभा चुनाव पर आयोग लेगा फैसला
  • प्रधानमंत्री व गृह मंत्री ने भी चुनाव के लिए पहले ही किया था आश्वस्त
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Lt Governor manoj sinha - फोटो : @manojsinha_
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विस्तार
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उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर के विभाजन को लेकर चल रही चर्चाओं को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह कुछ स्वार्थी तत्वों की साजिश है। अपने स्वार्थ के लिए वे इस प्रकार की अफवाहें फैला रहे हैं। इन साजिशों को किसी प्रकार से सफल नहीं होने दिया जाएगा।

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एक टीवी चैनल से साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल व तमिलनाडु चुनाव से पहले सुरक्षा बलों की कंपनियां बाहर गई थीं। इनमें सात कंपनियां पहले ही आ गई थीं। शेष जवान क्वारंटीन थे जो अब यहां आए हैं। वैसे भी जब अमरनाथ यात्रा का समय होता है तो केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त फोर्स भेजी जाती है। कहा कि वे जिम्मेदारी के साथ कह रहे हैं कि प्रदेश के विभाजन की बात पूरी तरह से निराधार है। न तो इस मसले पर कोई विचार हुआ, न चर्चा होने वाला है और न ही चर्चा होगी। 

इन सब फिजूल की बातों पर जनता कतई ध्यान न दे। कुछ संगठनों की ओर से भेदभाव का आरोप लगाते हुए जम्मू को राज्य का दर्जा देने की मांग की जाती रही है। संविधान में सबको अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। लेकिन अब यह जमाना खत्म हो गया है कि किसी के साथ भेदभाव हो। जम्मू और कश्मीर दोनों हमारी दो आंखें हैं। पिछले 11 महीने के कार्यकाल में दोनों संभाग में विकास से जुड़ा ऐसा कोई फैसला नहीं किया गया जिससे भेदभाव की बू आए।
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कहा कि विधानसभा चुनाव के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किला से घोषणा की थी कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव होंगे। गृह मंत्री ने संसद में भरोसा दिलाया है। इसलिए एक बार जब चुनाव आयोग परिसीमन पूरा कर लेगा तो चुनाव होंगे। कहा कि नेशनल कांफ्रेंस ने अब परिसीमन आयोग की बैठक में भाग लेने का संकेत दिया है जो अच्छा कदम है। चूंकि परिसीमन सांविधानिक काम है। इस वजह से पार्टी के सांसदों को उसमें भाग लेना चाहिए। जहां तक 370 को लेकर उनके लड़ाई जारी रखने की बात है तो वे इसमें कुछ नहीं कह सकते। लेकिन डॉ. फारूक अब्दुल्ला के बयान पर भी गौर किया जाना चाहिए। 

फारूक के बयान कि केंद्र से बातचीत के विकल्प खुले हैं की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवादियों का डर अब खत्म हो गया है। आतंकी घटनाओं का ग्राफ गिरा है। आतंकियों की भर्ती भी कम हुई है। सुरक्षा बलों की पकड़ ज्यादा मजबूत हुई है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पर्यटक काफी बढ़े हैं। होटलों में सभी कमरे फुल थे, हालांकि कोरोना के संक्रमण से अभी थोड़ी स्थिति बदली है। 

कहा कि मुट्ठी भर लोग नहीं चाहते कि यहां अमन रहे। कुछ लोग सांप्रदायिक माहौल बनाने में भी लगे हुए हैं। इन सब चीजों की बारीकी से जांच कराई जा रही है। ऐसे लोग बख्शे नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रमों में एनसीसी को शामिल करने का उत्साहजनक परिणाम सामने आया है। घाटी में भी बच्चे एनसीसी में शामिल हो रहे हैं। कश्मीर विश्वविद्यालय ने वैकल्पिक विषय के रूप में इसे रखा है। जम्मू में पहले से ही यह पाठ्यक्रम का हिस्सा था।

अमरनाथ यात्रा पर पूरी स्थिति का विश्लेषण कर फैसला
उप राज्यपाल ने कहा कि अमरनाथ यात्रा पर कोरोना की स्थिति में सुधार होने पर पूरी स्थिति का विश्लेषण कर फैसला लिया जाएगा। लोगों की जिंदगी बचाना ज्यादा महत्वपूर्ण है। यात्रा के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन कोरोना संक्रमण बढ़ने के कारण इसे रोकना पड़ा। प्रशासन की पूरी नजर है। वह यात्रियों की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखते हुए फैसला करेगा।

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