जम्मू कश्मीर विद्युत विकास विभाग (जेकेपीडीडी) में 2012-13 और 2016-17 के लिए बिजली खरीद समझौतों और विद्युत राजस्व संग्रह के प्रदर्शन में कई खामियां सामने आई हैं। 2012 से 2017 में जम्मू कश्मीर में 14871 करोड़ रुपये की बिजली खरीद का घाटा हुआ।
जबकि 2012-17 के दौरान बिजली खरीद पर किए गए 24,299 करोड़ रुपये के खर्च के मुकाबले 9,428 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। इसका खुलासा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की सामाजिक, सामान्य, आर्थिक (गैर-पीएसयूएस) क्षेत्र 31 मार्च 2017 की रिपोर्ट में हुआ है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि विभाग (पीडीडी) अपनी बिजली की आवश्यकता को पूरा करने में विफल रहा। राज्य में उपलब्ध मांग और स्वयं सृजन उपलब्धता के बीच का अंतर 77 प्रतिशत और 84 प्रतिशत के बीच रहा। राज्य की बिजली की आवश्यकता का लगभग 73 प्रतिशत से 76 प्रतिशत हिस्सा केंद्रीय उत्पादन स्टेशनों से खरीद के माध्यम से पूरा किया गया।
जेकेपीडीडी की योजना की कमियों और बिजली खरीद लागत के गैर-अनुकूलन के कारण 2012-17 के दौरान खरीदी गई बिजली पर 840 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय किया। जेकेपीडीडी ने देर से भुगतान के लिए 1,420.26 करोड़ रुपये का सरचार्ज भुगतान किया और कम वित्तीय प्रबंधन के कारण 297.92 करोड़ रुपये की छूट का लाभ उठाने का अवसर खो दिया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि विलंबित भुगतानों के लिए नियमन लागू करने के कारण बिना किसी अतिरिक्त बिजली के निर्धारित शुल्क की ओर 33.67 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े।