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नाव वालों की मनमानी, बाढ़ पीड़ितों से वसूल रहे पैसे

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बाढ़ प्रभावित इलाके में फंसे लोगों से नाव चालक मनमानी राशि वसूल कर रहे हैं। इसी होटल में फंसे विजय कुमार धमाकिया के अनुसार उन्होंने बड़ी मुश्किल से एक नाव संचालक को मनाया। उसने 27 लोगों को बाहर निकालने के लिए 31 हजार रुपये मांगे।
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किसी तरह उन्होंने रुपये जमाकर उसे दिए। नाव चालक उन्हें निकालकर एक छोटे से पहाड़ी इलाके में ले गया। जहां से वे एक घंटा पैदल चलकर एयरपोर्ट पहुंचे। वहां लंबे इंतजार के बाद उन्हें एयर टिकट मिली और वे घर वापस लौट सके। उन्होंने बताया कि नाव वाले भेदभाव भी कर रहे हैं। स्थानीय लोगों को मदद की जा रही है।

श्रीनगर के इंदिरा नगर स्थित होटल ग्रैंड मुश्ताक की तीन मंजिल पिछले पांच दिनों से बाढ़ के पानी में डूबी हैं। इस होटल में सचिवालय के अफसरों को ठहराया जाता है। लेकिन इन अफसरों को भी पिछले तीन दिनों से भूखे प्यासे किसी तरह समय निकालना पड़ा।
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सेना ना होती तो पेश आती असली समस्या

कई दिनों से न घर वालों से बातचीत हो सकी है न ही किसी से संपर्क। होटल में फंसे अजय पांडे खुशकिस्मत हैं कि वह राज्य सरकार के हेलीकाप्टर द्वारा एयरलिफ्ट कर सुरक्षित बाहर निकाले गए। उन्हें पहले श्रीनगर एयरपोर्ट पहुंचाया गया, जहां से वह वायुसेना के विमान से जम्मू पहुंचे।

बुधवार सुबह उन्होंने घर वालों को बताया था कि उनके पास न खाने को कुछ हैं और न ही पीने का साफ पानी। किसी भी अफसर से संपर्क नहीं हो पा रहा। उन्होंने बताया कि पिछले छह दिन अंधेरे में गुजारने पड़े। बुधवार सुबह लगभग दस बजे सरकारी हेलीकाप्टर आने से उन्हें राहत मिली। बेमिना स्थित सरकारी क्वार्टर में फंसे उधमपुर निवासी अक्षय का कहना है कि यदि सेना न होती तो उन्हें भारी समस्या होती।

अपने पिता और पत्नी के साथ पिछले एक सप्ताह से अक्षय सरकारी क्वार्टर की तीसरी मंजिल पर रहे। इस दौरान उन्हें अकसर डर लगा रहता था कि कहीं बाढ़ का पानी बढ़ न जाए। सेना की बोट ने उन्हें बेमिना से बाढ़ से निकाला। फिर किसी तरह वे एयरपोर्ट पहुंचे। जहां से सेना की कारगो ने उन्हें जम्मू पहुंचाया।

अपनों के लिए एयरपोर्ट के बाहर डेरा डाला

जानीपुर निवासी रोहित अपने भाई की तस्वीर लेकर सबको पूछ रहे थे कि क्या इन्हें कहीं देखा है। यात्रियों को लेकर क्या कोई नई फ्लाइट आ रही है। वहां बाढ़ में फंसे लोग सुरक्षित तो हैं। तकनीकी एयरपोर्ट जम्मू में पिछले तीन दिन से अपनों के इंतजार के लिए पहुंच रहे लोगों के चेहरों पर बस यही कहानी है।

हाथों में तस्वीर, मुख पर बेचैनी और सूखी आंखों में हर कोई अपनों की तलाश कर रहा है। लेकिन कोई जानकारी न मिलने पर प्रशासन के प्रति भी जबरदस्त रोष है। बुधवार को भी लोगों ने एयरपोर्ट के बाहर रास्ता रोकने की कोशिश की।

प्रदर्शन पर उतरे लोगों की पुलिस के साथ कहासुनी भी हुई। उन्होंने बचाव कार्यों में ओहदेदार लोगों को ही प्राथमिकता देने के आरोप लगाए।
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बसों में या तो पर्यटक या रसूखदार लोग

एयरपोर्ट के बाहर पहुंचे पंकज ने बताया कि वह कई दिन से एयरपोर्ट के बाहर पहुंच रहे हैं। लेकिन प्रशासन की ओर से श्रीनगर में फंसे लोगों की कोई सूची उन्हें उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है। फ्लाइट से आने वाले लोगों के बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी जा रही है।

एयरपोर्ट के भीतर से जो बसें बाहर निकल रही हैं वे या तो पर्यटक हैं या फिर पहुंच रखने वाले। आम यात्रियों को कोई नहीं पूछ रहा है। लोगों ने रोष जताते हुए कहा कि बाढ़ से प्रभावितों की कोई सही जानकारी नहीं दी जा रही है। यह क्रम पिछले कई दिन से जारी है।

इस बीच एयरपोर्ट से बाहर यात्रियों को लेकर निकलने वाली बसों के भीतर लोग अपनों की तलाश करने का साथ उनकी तस्वीरें दिखाकर जानकारी लेने की कोशिशें कर रहे हैं। यही नहीं कई लोग दिन रात अपनों के इंतजार में एयरपोर्ट के बाहर बैठे हैं।
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