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Lok Sabha Elections : कश्मीर के सियासी अखाड़े से दूर रहकर भी मैदान मार गए मोदी, परिवारवादी राजनीति खारिज

Wed, 05 Jun 2024 03:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा डॉ. बृजेश कुमार सिंह, जम्मू

सार

कश्मीर के सियासी अखाड़े दूर रहकर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मैदान मार ले गए। परिवारवादी राजनीति के खिलाफ उनकी लड़ाई ने रंग दिखाया और बारामुला सीट से उमर अब्दुल्ला व अनंतनाग से महबूबा मुफ्ती को अवाम ने नकार दिया।
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पीएम मोदी - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर में लोकसभा चुनाव परिणाम कई मायने में महत्वपूर्ण हैं। कश्मीर के सियासी अखाड़े दूर रहकर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मैदान मार ले गए। परिवारवादी राजनीति के खिलाफ उनकी लड़ाई ने रंग दिखाया और बारामुला सीट से उमर अब्दुल्ला व अनंतनाग से महबूबा मुफ्ती को अवाम ने नकार दिया। भाजपा हमेशा जम्मू-कश्मीर को तीन परिवारों कांग्रेस, अब्दुल्ला व मुफ्ती से बचाने की लड़ाई लड़ते रही है।

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भाजपा दो सीटों पर कब्जा जमाकर अपनी साख बचाने में कामयाब रही। इंडिया ब्लॉक का जादू नहीं चल पाया। कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया तो नेकां को एक सीट गंवानी पड़ी। परिवारवादी पार्टियों नेकां-पीडीपी को कीमत चुकानी पड़ी। पीडीपी, अपनी पार्टी, डीपीएपी, पीपुल्स कांफ्रेंस का खाता तक नहीं खुल सका। भाजपा का पहाड़ी कार्ड अनंतनाग-राजोरी सीट पर नहीं चल पाया।

पांच लोकसभा सीटों में जम्मू और उधमपुर के परिणाम में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला। अनंतनाग राजोरी सीट पर नेकां, पीडीपी और भाजपा समर्थित अपनी पार्टी का मुकाबला था। शुरू से ही नेकां ने एकतरफा बढ़त हासिल की और चुनाव जीतने में सफल रही। यहां लोगों ने परिवारवादी पार्टी पीडीपी की मुखिया महबूबा मुफ्ती को हरा दिया। इसी तरह बारामुला में भी परिवारवादी पार्टी नेकां के उमर अब्दुल्ला को जनता ने नकार दिया।
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इंडिया बलॉक ने कोई खास कमाल नहीं दिखाया। गठबंधन में शामिल कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया। उसे उधमपुर व जम्मू दोनों सीटों पर हार का स्वाद चखना पड़ा। नेकां को एक सीट का नुकसान उठाना पड़ा। 2019 में नेकां के पास कश्मीर की तीन सीटें थी, लेकिन इस बार बारामुला सीट हाथ से निकल गई। उत्तरी कश्मीर में सक्रिय पीपुल्स कांफ्रेंस तथा अनुच्छेद 370 के बाद बनी नई पार्टियां अपनी पार्टी और डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी का खाता नहीं खुल सका। दोनों पार्टियों ने बारामुला को छोड़कर शेष दो सीटों अनंतनाग व श्रीनगर में अपने प्रत्याशी उतारे थे। दोनों को क्रमश: तीसरे और चौथे स्थान पर रहना पड़ा।

उधर, अनंतनाग-राजोरी सीट पर भाजपा ने अपनी पार्टी को समर्थन देते हुए पहाड़ी कार्ड चलने की कोशिश की थी, जो सफल नहीं हुआ। राजोरी-पुंछ की सात विधानसभा सीटों पर पीडीपी की महबूबा मुफ्ती और अपनी पार्टी के जफर इकबाल मन्हास को 87 हजार से अधिक वोट मिले, जबकि नेकां को अकेले 2.98 लाख मत हासिल हुए।

लद्दाख में भाजपा के लिए खतरे की घंटी
लद्दाख में भी सत्ता विरोधी लहर ने उलटफेर करते हुए भाजपा के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। छठी अनुसूची में लद्दाख को शामिल करने की मांग की अनदेखी से सत्ता से नाराजगी ने उसकी हैट्रिक की राह रोक दी। यहां भाजपा और कांग्रेस को नकारते हुए लोगों ने निर्दल को अपना नुमाइंदा चुन लिया।

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