सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण लद्दाख संसदीय सीट के लिए अभी तक प्रत्याशियों के नाम का एलान नहीं हुआ है, लेकिन मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस यहां परंपरागत प्रतिद्वंद्वी रहे हैं।
अब यहां तीसरा मोर्चा भी आकार लेने की कोशिश में है।
राज्य के दर्जे तथा छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर आंदोलनरत लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) संयुक्त रूप से मैदान में उतरने की तैयारी में है। भाजपा में अंदरुनी कलह है, जिसे सुलझाने में पार्टी नेतृत्व लगा हुआ है।
भाजपा यहां हैट्रिक लगाने की कोशिश में है। इस वजह से उसकी साख दांव पर है। यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि अनुच्छेद 370 हटाकर लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के फैसले पर मौजूदा चुनाव में मुहर लगेगी।
प्रत्याशी को लेकर विचार शुरू पर फैसला नहीं
1967 से अब तक हुए चुनाव में छह बार कांग्रेस, दो बार नेकां, तीन बार निर्दल तथा दो बार ही भाजपा जीती है। भाजपा यहां 2014 से जीत रही है, जबकि कांग्रेस ने आखिरी बार 1996 में यहां जीत हासिल की थी। 1998 व 1999 में नेकां को जीत मिली थी, लेकिन बाद के दो चुनाव 2004 व 2009 में निर्दलीय संसद तक पहुंचे थे।