जम्मू-कश्मीर के बनिहाल में फिर से पुलवामा जैसे हमले की साजिश ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। सवाल सीधा है कि आखिर पुलवामा घटना से सीख क्या ली गई? ऊपर से कश्मीर में लोकसभा चुनाव है। इसमें मतदाताओं को पुख्ता सुरक्षा मुहैया कराने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इस घटना ने इन दावों की पोल खोल दी है। सुरक्षाबलों के लिए कश्मीर में बिना किसी आतंकी वारदात के चुनाव कराना आसान नहीं होगा।
खुफिया एजेंसियों ने पहले से ही इनपुट दिए हुए हैं कि, लोकसभा चुनाव के दौरान कश्मीर में बड़े हमले किए जा सकते हैं। इसमें उम्मीदवारों और उनके कार्यकर्ताओं को भी निशाना बनाया जा सकता है। बावजूद इसके यह हमला हुआ है। राज्य की पुलिस भी इसे लेकर सतर्क नहीं है। बनिहाल की घटना पर रामबन की एसएसपी अनीता शर्मा से कई बार बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
साफ्ट टारगेट की फिराक में
पुलवामा की घटना के बाद सुरक्षाबलों का पूरा ध्यान कश्मीर में है। वैसे भी जवाहर टनल को जब जम्मू आते वक्त क्रास कर लिया जाए जो यह जम्मू संभाग का क्षेत्र कहलाता है। क्योंकि पुलवामा घटना के बाद कश्मीर में अलर्ट है। सुरक्षा कड़ी है। इसलिए माना जा रहा है कि आतंकियों ने घटना को अंजाम देने के लिए जम्मू संभाग को चुना। क्योंकि आतंकी को मालूम था कि जम्मू संभाग में कश्मीर की तुलना में सुरक्षा इतनी कड़ी नहीं है।