जम्मू-कश्मीर में इस लोकसभा चुनाव में तीन परिवारों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी। मुफ्ती व अब्दुल्ला परिवार के साथ-साथ राज परिवार का सियासी भविष्य भी गुरुवार को लगभग तह हो गया है। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, नेकां प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला के साथ ही राज परिवार के सदस्य विक्रमादित्य सिंह ने लोकसभा चुनाव में ताल ठोंकी थी।
गुरुवार दोपहर 12 बजे तक महबूबा मुफ्ती अनंतनाग सीट पर 5706 वोटों से पीछे चल रही हैं। अनंतनाग सीट पर वह तीसरे नंबर पर हैं। वहीं फारूक अब्दुल्ला श्रीनगर सीट पर शुरुआत से ही बढ़त बनाए हुए हैं। वह 61709 वोटों से बढ़त बनाए हुए हैं। वहीं उधमपुर-डोडा लोकसभा सीट से प्रत्याशी राज परिवार के विक्रमादित्य सिंह 2,04,960 मतों से बीजेपी प्रत्याशी से पीछे चल रहे हैं।
महबूबा व फारूक अब्दुल्ला पहले भी लोकसभा में रह चुके हैं, लेकिन राज परिवार के विक्रमादित्य सिंह की यह पहली पारी थी। इससे पहले वे पीडीपी के एमएलसी रह चुके हैं। महाराजा हरि सिंह के जन्म दिन पर अवकाश को लेकर उभरे विवाद के बाद उन्होंने न केवल एमएलसी पद से इस्तीफा दिया बल्कि पीडीपी भी छोड़ दी थी। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनावों में पीडीपी के लिए उन्होंने जम्मू संभाग में काफी मेहनत की थी।
फारूक अब्दुल्ला श्रीनगर संसदीय सीट से मैदान में थे जहां 14.1 प्रतिशत मत पड़े थे। महबूबा अनंतनाग सीट से ताल ठोंक रहीं थीं जहां तीन चरणों में मतदान हुए, लेकिन मतदान प्रतिशत तीन प्रतिशत से भी कम रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि घाटी में मतदान का प्रतिशत इतना कम रहा है कि जीत-हार का अंतर बहुत ही मामूली हो सकता है। उधमपुर में 70.2 फीसदी मतदान हुआ है। यहां भाजपा के डॉ. जितेंद्र सिंह तथा विक्रमादित्य सिंह के बीच सीधा मुकाबला हो रहा है।
कांग्रेस को सबसे अधिक चिंता
परिणाम को लेकर सबसे अधिक चिंता कांग्रेस खेमे में है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीए मीर अनंतनाग, पूर्व मंत्री रमन भल्ला जम्मू व रिगजिन स्पालबार लद्दाख से मैदान में थे। पार्टी की चिंता है कि यदि पिछले चुनाव से बेहतर नहीं हुआ तो अगले कुछ महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव पर भी इसका साफ असर दिखेगा।