उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के सोपोर में एक बार फिर भाईचारे की मिसाल देखने को मिली। सोपोर के जलूरा गांव में एक कश्मीरी पंडित के निधन के बाद स्थानीय मुस्लिमों ने भी पार्थिव शरीर को कंधा दिया। स्वर्गीय अरधानाथ पंडित की 110 वर्षीय पत्नी रूपा देवी का वीरवार को निधन हो गया।
मुस्लिम समुदाय के लोगों ने हिंदू संस्कृति के अनुसार अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया। रूपा के पड़ोसी अब्दुल रशीद मीर ने बताया कि हमने भाईचारे का परिचय देते हुए अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया। हमें विभाजनकारी राजनीति से मतलब नहीं है। हम कश्मीर की मिली जुली संस्कृति में विश्वास रखते हैं।
रूपा के पुत्र रमेश कुमार ने बताया कि अंतिम संस्कार में शामिल होने वालों में ज्यादातर मुस्लिम समुदाय से थे। वे हिंदुओं तथा मुसलमानों को बांटने के प्रयासों को नकारते हुए कहते हैं कि वे शांति तथा सौहार्द्र के साथ रह रहे हैं।
ज्ञात हो कि 90 के दशक में जब ज्यादातर कश्मीरी पंडितों ने घाटी छोड़ दिया था तो रूपा देवी ने कश्मीर में ही रहने का फैसला किया था।