जम्मू-कश्मीर में अब आकांक्षी शहर व पंचायतें बनेंगी। इनके बीच प्रतियोगिताएं होंगी। प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पाने वालों को पुरस्कृत और प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए 200 करोड़ रुपये का कोष स्थापित किया गया है। साथ ही पूरे प्रदेश में सबसे पिछड़ी 285 पंचायतें (प्रति ब्लॉक एक पंचायत ) चिह्नित की जाएंगी, जिनके विकास के लिए अलग से काम होगा। जम्मू-कश्मीर के कृषि क्षेत्र के लिए पांच वर्ष का रोडमैप तैयार किया गया है, जिस पर 5013 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
इस कार्यक्रम में ग्रामीण क्षेत्रों में बसे लोगों के जीवन से संबंधित सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के लिए पंचायत विकास सूचकांक तैयार किया जाएगा। यह कवायद एस्पिरेशनल (आकांक्षी) ब्लॉक डेवलपमेंट कार्यक्रम की तर्ज पर की जाएगी। इसमें कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए 6 संकेतक, स्वास्थ्य व पोषण के लिए 11, शिक्षा के लिए 13, ग्रामीण विकास और स्वच्छता के लिए 7, लाभार्थी उन्मुख योजनाओं के लिए 4, कौशल विकास के लिए 4, बुनियादी ढांचे के लिए 17, पर्यावरण के लिए 5, सुशासन के लिए 33 संकेतक होंगे।
इनमें 9 क्षेत्रों में 100 संकेतकों की पहचान की जाएगी। इन क्षेत्रों के महत्व के आधार पर ग्रामीण आबादी के जीवन में प्रासंगिकता के अनुसार प्रत्येक क्षेत्र और उप संकेतकों को महत्व दिया जाएगा। इन महत्वाकांक्षी पंचायतों को विभिन्न जिला/संघ शासित प्रदेशों की योजनाओं और केंद्र प्रायोजित योजनाओं व कार्यक्रमों के अभिसरण के माध्यम से विकसित किया जाएगा। चयनित पंचायतों को विकास के लिए 10 लाख रुपये मिलेंगे। इनमें कुल 4291 पंचायतों में से सबसे पिछड़ी पंचायतों का चयन किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में जम्मू कश्मीर नगर पालिकाओं में सुधारों के उपक्रम को प्रोत्साहित करने के लिए एस्पिरेशनल टाउन डेवलपमेंट प्रोग्राम (एटीडीपी), शहरी सुधार प्रोत्साहन कोष (यूआरआईएफ) और विभिन्न नगर पालिकाओं की रेटिंग के लिए आकलन ढांचे को विकसित किया जाएगा।
मूल्यांकन ढांचा सात वर्टिकल/स्तंभों में नगरपालिकाओं के क्षेत्रीय प्रदर्शन की जांच करता है। इसमें आर्थिक क्षमता, तकनीकी, शहरी नियोजन, शासन, स्थिरता, जलवायु लचीलापन, नागरिक धारणा आदि सहित 37 क्षेत्र/श्रेणियां और 138 संकेतक शामिल हैं।
इन नगरपालिकाओं के प्रदर्शन के आधार पर जम्मू कश्मीर एमडीआई-2022 के तहत निर्धारित बेंचमार्क और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली नगरपालिकाओं को यूआरआईएफ (शहरी सुधार प्रोत्साहन निधि) के रूप में अतिरिक्त अनुदान सहायता के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाएगा।