उप राज्यपाल ने कहा, यह नया हाईकोर्ट भवन अत्याधुनिक भौतिक बुनियादी ढांचे और सुविधाओं से युक्त एकीकृत परिसर होगा। उन्होंने कहा कि शासन प्रक्रिया को पारदर्शी, जवाबदेह और उत्तरदायी बनाने के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन कई आईटी पहल कर रहा है।
देश के साथ जम्मू-कश्मीर में ई-कोर्ट सेवाओं से डिजिटल सशक्तीकरण बढ़ा है। ई-कोर्ट सेवाओं पर प्रतिदिन लाखों हिट्स नागरिक-केंद्रित प्रयासों व न्याय में आसानी डिजिटल सशक्तीकरण को दर्शाते हैं। सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी, कानून एवं न्यायिक विभाग अदालतों में निर्बाध व कुशल न्याय वितरण प्रणाली के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी जैसी भविष्य की तकनीकों को उपयोग करने के प्रयास कर रहे हैं।
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ये बातें उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को कन्वेंशन सेंटर में रैका में बनाए जा रहे हाईकोर्ट भवन के शिलान्यास कार्यक्रम में कहीं। उप राज्यपाल ने कहा, यह नया हाईकोर्ट भवन अत्याधुनिक भौतिक बुनियादी ढांचे और सुविधाओं से युक्त एक एकीकृत परिसर होगा।
उन्होंने कहा कि शासन प्रक्रिया को पारदर्शी, जवाबदेह और उत्तरदायी बनाने के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन कई आईटी पहल कर रहा है। भारत की आजादी के 75 साल की यात्रा लोकतांत्रिक संस्थाओं की ओर से आम नागरिकों की आशा व आकांक्षाओं को पूरा करने की गवाह है।
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संविधान ने मार्गदर्शक के रूप में सभी के लिए समृद्धि, सामाजिक-आर्थिक प्रगति और सम्मान सुनिश्चित किया है। सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर में अदालतों की आईसीटी क्षमता के लिए विभिन्न पहलों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज शुरू की गई दो महत्वपूर्ण आईटी पहल कानूनी प्रणाली को सभी के लिए समावेशी और सुलभ बनाएगी।
रैका में हाईकोर्ट भवन के लिए केंद्र से बात कर राशि मंजूर करवाई
एलजी मनोज सिन्हा ने कहा, रेका में हाईकोर्ट भवन की परियोजना काफी बड़ी है। जब उनके पास प्रस्ताव आया तो सोच में पड़ गए कि 1800 करोड़ रुपये कहां से आएंगे, लेकिन उन्होंने केंद्र में बात की और राशि के लिए मंजूरी मिल गई। कहा कि इसके लिए जो भी जरूरी होगा वो किया जाएगा। नए परिसर से काफी लाभ होगा। उन्होंने इस परियोजना के लिए न्यायपालिका के सदस्यों को बधाई दी है।
न्यायपालिका के लिए जो बजट चाहिए, उपलब्ध करवाएंगे : मेघवाल
केंद्रीय न्यायिक मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में जुड़े। उन्होंने कहा कि उप राज्यपाल ने उनसे हाईकोर्ट परिसर की बात की थी। कहा कि न्यायपालिका और इसकी व्यवस्था में सुधार करने के लिए जितना बजट चाहिए, सरकार उतना बजट उपलब्ध कराएगी। न्यायिक व्यवस्था को मजबूती देना सरकार की प्राथमिकता है।