प्रदेश में स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है, जो उद्यमशीलता का समर्थन करने के साथ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में मदद करेगा।
जम्मू-कश्मीर में विकास को और गति देने के लिए स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाया जाए। आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने के लिए इस दिशा में गंभीरता दिखाई जाए और अधिक से अधिक लोगों खासतौर पर युवाओं को जोड़ने पर काम किया जाए। यह बातें उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने नागरिक सचिवालय में सोमवार को उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की समीक्षा बैठक में कहीं।
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उन्होंने कहा कि गत वर्ष दर्ज की गई विकास की गति को बनाए रखना है। इसके लिए प्रदेश में स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है, जो उद्यमशीलता का समर्थन करने के साथ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में मदद करेगा।
इस दौरान उप राज्यपाल को जम्मू-कश्मीर में एक मजबूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की दिशा में की गई प्रगति और हासिल की गई उपलब्धियों के बारे में बताया गया। एक जिले की वास्तविक क्षमता का एहसास करने, आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और रोजगार पैदा करने के लिए एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) और जिला निर्यात योजना पर भी चर्चा की गई।
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उप राज्यपाल ने कहा कि जिला स्तर के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की ख्याति के लिए उचित प्रयास किए जाने चाहिए। निर्यात क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास के लिए सकारात्मक कदम उठाए गए हैं। निवेशकों के लिए सरल औद्योगिक नीति लाई गई है। यही कारण है कि स्वदेश के बाद विदेशी निवेशकों ने जम्मू-कश्मीर में रुझान दिखाना शुरू कर दिया है। इससे रोजगार के साधन बढ़ेंगे।
इस दौरान मुख्य सचिव डाॅ. अरुण कुमार मेहता, प्रशांत गोयल प्रमुख सचिव उद्योग और वाणिज्य विभाग, एच. राजेश प्रसाद प्रधान सचिव आवास व शहरी विकास विभाग, सरिता चौहान आयुक्त/सचिव श्रम एवं रोजगार विभाग, डाॅ. मनदीप कुमार भंडारी उप राज्यपाल के प्रधान सचिव, राजस्व विभाग के प्रशासनिक सचिव डॉ. पीयूष सिंगला सहित यूटी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।