अमृत काल के दौरान क्षमता, प्रतिस्पर्धा और युवा राष्ट्र निर्माण का अहम घटक हैं। यह बात उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को गुजरात के प्राणसाला में युवा व्यक्तित्व विकास के लिए आयोजित राष्ट्र कथा शिविर में कही।
उन्होंने कहा विकास की गति युवाओं पर निर्भर करती है। युवा वर्ग सृजनात्मकता और अन्वेषण के माध्यम से समाज में बड़ा बदलाव लाने का महत्वपूर्ण स्रोत है। उन्होंने कहा बिना व्यावहारिक ज्ञान में शिक्षा का कोई महत्व नहीं है। हमें महात्मा गांधी की शिक्षाओं का अनुसरण करना चाहिए और अनुभव के आधार पर सीखने का प्रयास भी निरंतर करते रहना चाहिए।
मनोज सिन्हा ने कहा, हमें ऐसा वातावरण तैयार करने की जरूरत है, जिससे युवा वर्ग को नई खोज और नए अन्वेषण के लिए प्रोत्साहित किया जाए। अनुभव के आधार पर जो ज्ञान हासिल होता है, उससे ही समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। एलजी ने कहा कि सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती। यह जीवन प्रयंत चलने वाली है। युवाओं को साहस और अन्वेषण के साथ हर क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए आगे आना चाहिए। एलजी ने युवाओं का समाज में ज्ञान की रोशनी जलाने का आह्वान करते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में बदलने के लिए यह जरूरी है।
उन्होंने युवाओं को महात्मा गांधी, सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसी महान शख्सियतों का अनुसरण करते हुए देश को शांति और खुशहाली की राह पर अग्रसर करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा की क्षमता को युवाओं में विकसित करने की जरूरत है। इससे बुनियादी समस्याओं का सामना करने व उनका हल ढूंढने के लिए वे सक्षम हो सकेंगे व भ्रष्टाचार मुक्त, पारदर्शी शासन में अपनी भूमिका भी निभा पाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समाज में प्रत्येक वर्ग को विकास के बराबरी के मौके मुहैया करवा रहे हैं। इस शिविर में हिस्सा ले रहे जम्मू-कश्मीर के युवाओं ने प्रदेश में बदलते परिदृश्य को बयां किया। मौके पर वैदिक मिशन ट्रस्ट के संस्थापक स्वामी धर्मा बंधु, ले. जनरल रणधीर कुमार मेहता, शिक्षाविद जेएस राजपूत भी मौजूद रहे।