श्रीनगर में कार्यक्रम के दौरान मनोज सिन्हा
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उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बेघरों को घर देने के हाल के फैसले का विरोध करने वाले क्षेत्रीय दलों पर शुक्रवार को जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वे दिन गए, जब कुछ लोग अपने आप को सरकारी संपत्ति और फंड का मालिक समझा करते थे। वे यह समझते थे कि सरकारी संपत्तियों पर केवल उनका ही हक है।
गरीब लोगों को सरकारी संपत्तियों का उपयोग करने से रोका जाता रहा है। ऐसे लोगों को अब यह अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि 5 अगस्त 2019 के बाद से इस प्रकार का भेदभाव पूरी तरह समाप्त हो गया है। एसकेआईसीसी में राष्ट्रीय जनजातीय महोत्सव को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि हाल में 2711 भूमिहीन परिवारों को जमीन और बेघर लोगों को घर देने की घोषणा की गई थी।
इसने कुछ लोगों को परेशान कर दिया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और अन्य क्षेत्रीय दलों के नेताओं जिन्होंने प्रशासन के फैसले का विरोध किया है, उन्हें बताना चाहता हूं कि वे दिन गए जब वे खुद को सरकारी संपत्ति और धन के मालिक मानते थे।
ऐसे नेता ऐसे फैसले ले रहे थे, जो उनके राजनीतिक हितों के अनुकूल थे। उपराज्यपाल ने कहा कि लोगों को गुमराह करके उनकी जमीनें हड़पने वाले नेता अब प्रदेश प्रशासन के फैसले को लेकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं।
पीएमएवाई से कुछ लोगों को हो रहा दर्द.
एलजी ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू की गई है। उन्होंने कहा, अब जब यह योजना जम्मू-कश्मीर में भी लागू की जा रही है, तो कुछ लोगों को दर्द महसूस हो रहा है। यह पीएम नरेंद्र मोदी का सपना है और पूरा होगा। प्रत्येक बेघर परिवार को 5 मरला जमीन मिलेगी ताकि वे अपने सपनों का घर बना सकें।
उन्होंने कहा कि बेघरों को घर उपलब्ध कराना प्रधानमंत्री का सपना है और गरीबों की सेवा करना प्रदेश प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ज्ञात हो कि उमर ने सवाल किया था कि जम्मू-कश्मीर में बेघर कौन हैं। पीडीपी प्रमुख महबूबा ने कहा था कि इस कदम का उद्देश्य बाहरी लोगों को यहां लाकर जम्मू-कश्मीर को झुग्गी बस्ती में बदलना है।