अमरनाथ यात्रियों को तत्काल घाटी छोड़ने की सलाह से उत्पन्न अफरातफरी के बीच घाटी में तेजी से राजनीतिक समीकरण भी बदले। सभी दलों ने एकजुटता प्रदर्शित करने की कोशिश की। नेकां को छोड़कर सभी दलों के नेताओं ने शुक्रवार की रात राजभवन पहुंचकर सरकारी आदेशों को लेकर उत्पन्न अफरातफरी के माहौल तथा लोगों की चिंताओं की जानकारी दी। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने नेताओं को आश्वस्त किया कि वे शांति बनाए रखें। अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें।
राज्यपाल से मिलकर पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, शाह फैसल, सज्जाद लोन व इमरान रजा अंसारी ने हालिया घटनाक्रम तथा गृह विभाग की ओर से जारी एडवाइजरी से घाटी में उत्पन्न डर के माहौल की जानकारी दी। राज्यपाल ने नेताओं को बताया कि अमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमले का गंभीर व विश्वसनीय इनपुट था।
15वीं कोर कमांडर व डीजीपी ने शुक्रवार को दोपहर में ही प्रेस कांफ्रेंस कर हथियार व गोला बारूद की बरामदगी की जानकारी दी। इस वजह से सरकार को एडवाइजारी जारी करनी पड़ी। पर्यटकों व अमरनाथ यात्रियों को इलाके की जानकारी न होने की वजह से आतंकी या फिदायीन हमले का वे शिकार हो सकते हैं।
सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह हर नागरिक को सुरक्षा मुहैया कराए। यह उनको किसी प्रकार के आतंकी हमले से बचाने के लिए उठाया गया कदम है। अनावश्यक रूप से इसे अन्य मुद्दों से जोड़कर खौफ का माहौल पैदा किया जा रहा है। उन्होंने राजनीतिक दलों के नेताओं से आग्रह किया कि वे अपने कार्यकर्ताओं को अफवाहों पर ध्यान न देने को कहें। ज्ञात हो कि राज्यपाल ने वीरवार को बारामुला में 35ए को लेकर स्थिति स्पष्ट की थी।
महबूबा देर शाम निकलीं नेताओं से मिलने
गृह विभाग की ओर से एडवाइजरी जारी करने के बाद पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती इसे लेकर सबसे पहले आगे बढ़ीं। वे घर से पैदल ही नेकां प्रमुख डा. फारूक अब्दुल्ला से मिलने जाने लगीं तो सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया और पैदल जाने के बजाय गाड़ी से जाने की सलाह दी। बाद में वे अब्दुल्ला से मिलने पहुंचीं।
महबूबा ने बताया कि फारूक की तबीयत खराब होने की वजह से वे सर्वदलीय बैठक नहीं बुला सके, लेकिन उन्होंने आश्वस्त किया है कि शनिवार को उमर अब्दुल्ला के लौटते ही सभी दलों की बैठक बुलाई जाएगी ताकि वर्तमान स्थिति पर चर्चा की जा सके। इसके बाद वे सज्जाद गनी लोन के घर गईं।