कोर्ट ने लश्कर ए तैयबा के ओवर ग्राउंड वर्कर की जमानत अर्जी खारिज कर दी। एनआईए के सब जज अश्विनी कुमार ने शुक्रवार को बारामुला के रहने वाले जावेद अहमद की जमानत अर्जी को नामंजूर कर दिया। जावेद को वर्ष 2018 में दबोचा गया था।
अथूरा इलाके में पुलिस, सेना, एसएसबी, सीआरपीएफ की ओर से एक आतंकी की सूचना पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। तभी आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर गोलियां बरसाना शुरू कर दीं। बाद में जब जांच हुई तो पता चला कि आतंकियों के साथ इलाके के ओजी वर्करों ने काम किया है। जिनकी मदद से यह लोग इलाके में मौजूद थे और किसी वारदात को अंजाम देने की कोशिश कर रहे थे।
यह लोग न सिर्फ आतंकियों की मदद करते थे, बल्कि युवाओं का आतंकी बनने के लिए ब्रेनवॉश भी करते थे। इन्हीं ओजी वर्करों की धरपकड़ में जावेद भी पकड़ा गया था। सब जज ने दोनों तरफ की दलीलें सुनने के बाद कहा कि आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती। क्योंकि सुरक्षा के लिहाज से यह लाजमी नहीं है। यदि आरोपी को जमानत दी जाती है तो वह अभियोजन पक्ष के सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है। इन दलीलों के साथ जमानत अर्जी को खारिज कर दिया गया।