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Jammu News: प्रदेश में भूस्खलन के नए संभावित क्षेत्रों की होगी पहचान

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जम्मू। 2023 में मानसून की बारिश के बाद हिमाचल, उत्तराखंड में हुए भूस्खलन के बाद अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भूस्खलन के नए संभावित क्षेत्रों की पहचान व मैपिंग की जाएगी। साथ ही एक स्थान पर बार-बार होने वाले भूस्खलन के पैटर्न का भी अध्ययन किया जाएगा, ताकि आने वाल वर्षों में लोगों को न सिर्फ ऐसे क्षेत्रों की जानकारी मिले, बल्कि भूस्खलन के पहले ही चेतावनी भी उन्हें मिले।
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जम्मू विवि का रिमोट सेंसिंग और जीआईएस विभाग जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में संभावित भूस्खलन क्षेत्रों की पहचान कर रहा है। लैंडस्लाइड इन्वेंटरी मैपिंग फॉर पोस्ट मानसून 2023 प्रोजेक्ट के तहत विभाग में काम हो रहा है। इसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सभी जिलों का अध्ययन किया जा रहा है। 2023 के मानसून के समय हुए भूस्खलन के आकलन के साथ ऐसे संभावित क्षेत्रों की पहचान की जा रही है, जहां भूस्खलन की संभावना काफी अधिक है। इस प्रोजेक्टर पर विभाग के प्रोफेसर अवतार सिंह जसरोटिया के मार्गदर्शन में तीन जूनियर रिसर्च फेलो काम कर रहे हैं। इस टीम ने अभी तक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 2023 के मानसून के दौरान हुए भूस्खलन का डेटा एकत्रित किया है। अब मई से ये टीम फील्ड विजिट कर इन क्षेत्रों की पहचान व मैपिंग करेगी। इसकी एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद इन क्षेत्रों के लोगों को पता चलेगा उनके क्षेत्र में भूस्खलन की कितनी संभावना है। अंतरिक्ष विभाग का नेशनल रिमोर्ट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) और इसरो द्वारा इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है। अब तक तैयार रिपोर्ट में टीम ने अभी तक हुए भूस्खलन के क्षेत्रों की पहचान की है। इसमें डोडा, रमबन, किश्तवाड़ में सबसे ज्यादा भूस्खलन संभावित क्षेत्र हैं, वहीं कठुआ के बनी इलाके में भी भूस्खलन की संभावना रही है। रिपोर्ट तैयार करने के दौरान ऐसे क्षेत्र जहां बार-बार भूस्खलन हो रहा है उनके पैटर्न को भी देखा जाएगा। रिपोर्ट तैयार होने के बाद एनआरएससी को सौंप दिया जाएगा। इसके बाद संभावित क्षेत्र में अतिरिक्त सावधानी बरतने में मदद मिलेगी। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भूस्खलन से जान और माल का बड़ा नुकसान होता है। सामान्य बारिश व मानसून के समय भूस्खलन संभावना अधिक हो जाती है। इस प्रोजेक्ट के प्रमुख अन्वेषक (पीआई) प्रो. अवतार सिंह जसरोटिया ने कहा कि इस अध्ययन से भूस्खलन क्षेत्रों की मैपिंग संभव हो पाएगी। इससे हम ऐसे स्थान पर अतिरिक्त सावधानियां बरत सकेंगे।

हर साल होते हैं भूस्खलन, लोगों की होती है मौत
जम्मू-कश्मीर में भूस्खलन में हर साल बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है। भूस्खलन का शिकार जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग सबसे ज्यादा रहता है। कई-कई दिनों तक वाहन फंसे रहते हैं। इस अध्ययन से संभावित क्षेत्रों की पहचान होगी जिससे ऐसे स्थान पर शासन-प्रशासन अतिरिक्त सावधानियां बरत सकेगा।
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