नगर परिषद में कार्यरत कैजुअल लेबर के नौ महीने के वेतन जारी करने की मांग पर वीरवार को भी विवाद जारी रहा। फिर से सीईओ के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। वहीं सीईओ ने कैजुअल लेबर के सामने शर्त रखी कि अगर सभी कैजुवल लेबर काम छोड़ने को तैयार होते हैं तो उनके बकाए का भुगतान कर दिया जाएगा। लंबी बहस के बाद सभी कैजुअल लेबरों ने काम छोड़ने के लिए हां कर दी। किसी ने लिखित में नहीं दी।
बसपा के जिला प्रभारी सरदार रंजीत सिंह के नेतृत्व में कैजुअल लेबर ने दोपहर में नगर परिषद कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान वरुण बंद्राल, विकास डोगरा, रोहित मट्टू, सुनील कुमार व अन्य ने बताया कि करीब नौ महीने से वेतन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भूख हड़ताल भी कर चुके हैं।
नगर परिषद के अधिकारियों से आश्वासन तो बहुत मिले, लेकिन किसी ने समस्या का हल नहीं किया। अब उनको काम से निकालने का प्रयास किया जा रहा है। वेतन नहीं मिलने के कारण सभी आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। अगर आज वेतन नहीं मिला तो शुक्रवार को स्वतंत्रता दिवस के दिन सभी बसपा कार्यकर्ताओं व नेताओं के साथ काले बिल्ले लगाकर प्रदर्शन किया जाएगा।
प्रदर्शन के बाद सभी सरदार रंजीत सिंह के साथ सीईओ केके चलोत्रा के पास पहुंचे। जहां सीईओ ने शर्त रखी कि अगर सभी काम छोड़ने का लिखित आश्वासन देते हैं तो आज ही वेतन जारी कर दिया जाए, क्योंकि नगर परिषद के पास इतनी राशि नहीं है कि इनको काम पर रखा जाए। इसलिए डायरेक्टर लोकल बाडी ने इनको निकालने के निर्देश दिए हैं।
लंबी बहस के बाद सभी कैजुअल लेबर काम छोड़ने को राजी हो गए। सरदार रंजीत सिंह ने बताया कि बातचीत के बाद सभी कैजुअल लेबर को सीईओ की तरफ से नौ महीने का वेतन जारी कर दिया गया है।