कार्यक्रम का शुभारंभ आजादी के अमृत महोत्सव के तहत संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशन में सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च ऑन डेवलपमेंट एंड चेंज (सीएआरडीसी), नई दिल्ली एवं सीमा जन कल्याण समिति, जम्मू कश्मीर के सहयोग से स्वतंत्रता आंदोलन के गुमनाम नायकों, संगठनों और स्थलों के भावपूर्ण स्मरण के लिए किया गया।
कार्यक्रम में आरएस पुरा क्षेत्र के क्रांतिकारियों के परिवारों को सम्मानित किया गया। उन्होंने आजाद हिंद फौज में अपना योगदान देते हुए देश की स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी। इस दौरान कुल 26 से अधिक परिवारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम प्रमुख देवेंद्र शर्मा ने अतिथियों का विधिवत परिचय एवं स्वागत कराया।
डॉ. अजय कुमार शर्मा, संयोजक, क्रांतितीर्थ जम्मू कश्मीर ने कहा कि क्रांतितीर्थ राष्ट्र जागरण का एक पर्व है। यह एक शृंखला मात्र नहीं बल्कि एक अभियान है। उन्होंने कहा कि क्रांतितीर्थ इस क्रांतिधरा के उन सभी अनाम और अज्ञात बलिदानियों व क्रांतिकारियों को कृतज्ञ भारतवासियों की ओर से वंदना की शृंखला है। इसी तरह जम्मू कश्मीर के विभिन्न जिलों में क्रांतितीर्थ की इस क्रांतिधरा के अंतर्गत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इस सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. प्रिंस रैना ने कहा कि जम्मू कश्मीर की धरती हमेशा ही बलिदानियों की धरती रही है। समारोह के विशिष्ट अतिथि पूर्व मंत्री शाम चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी के अमृत महोत्सव का आगाज भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष के उपलक्ष्य में किया था। उन्होंने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव ने देश के स्वर्णिम इतिहास, संस्कृति और उपलब्धियों से रुबरु होने का अवसर प्रदान किया है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. वीरेंद्र कौंडल ने राष्ट्र निर्माण में स्वतंत्रता सेनानियों की महान भूमिका और बलिदान को याद करते हुए कहा कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा के स्रोत बने रहेंगे। पुरषोत्तम शर्मा ने इस तरह का कार्यक्रम आयोजित करने के लिए सीएआरडीसी की प्रशंसा की। इस मौके पर पंडित अशोक खजुरिया, एडवोकेट देव राज, सरपंच विजय, सरपंच कैप्टन हंसराज, कुंदन लाल शर्मा, डीडीसी विजय मोट्टन, डीडीसी तरसेम शर्मा, डीडीसी सुरजीत कुमार, कुंदन पहलवान, चैपमैन लाल, राज कुमार पंच, राजेश कुमार, कैप्टन पूरन, जीवन रेखा व सुभाष शर्मा मौजूद रहे।