रियासत में केपीएस कैडर रिव्यू को लेकर उठे विवाद लगभग सुलझ गया है। मुख्यमंत्री की ओर से बनाई गई कैबिनेट सब कमेटी की राय है कि केपीएस को आईपीएस के समकक्ष दर्जा नहीं दिया जा सकता है। पूरे देश में ऐसी व्यवस्था नहीं है। इस पर पीडीपी और भाजपा में आम सहमति बन गई है।
भाजपा शुरू से ही इसकी मुखालफत करती रही है। पिछले दिनों कैबिनेट की बैठक में इस मुद्दे को लेकर उठे विवाद के बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती बैठक छोड़कर चलीं गईं थीं।
सूत्रों का कहना है कि उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री चंद्रप्रकाश गंगा की अध्यक्षता में हाल ही में सब कमेटी की हुई बैठक में इस मुद्दे पर विचार के दौरान यह राय सामने आई कि केपीएस को आईपीएस के समकक्ष सुविधाएं दी जाएं, इसमें किसी प्रकार की आपत्ति नहीं है, लेकिन आईजी जैसे पदों पर इनकी नियुक्ति नहीं की जा सकती है।
सीएम महबूबा मुफ्ती को सौंपी गई रिपोर्ट
सीएम महबूबा मुफ्ती
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इन्हें आईजी के समकक्ष कोई पद सृजित कर समायोजित किया जाए। मसलन डायरेक्टर जैसे पद बनाएं जाएं और फिर इस पर केपीएस को समायोजित किया जाए। इससे आईपीएस कैडर का सम्मान बना रहेगा और उनमें किसी प्रकार का असंतोष पैदा नहीं होगा। अन्यथा एक नई प्रकार की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
सूत्रों का कहना है कि बैठक में विभिन्न राज्यों की व्यवस्था का भी हवाला देते हुए कहा गया कि कहीं भी इस प्रकार की व्यवस्था नहीं है। सूत्रों ने बताया कि बैठक में पीडीपी के सदस्यों ने भी इस पर सहमति जताई।
कैबिनेट सब कमेटी ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी है। इस पर अब मुख्यमंत्री स्तर पर निर्णय होना है। सब कमेटी में भाजपा और पीडीपी के तीन-तीन सदस्य हैं।
मुख्यमंत्री ने किया सब कमेटी का गठन
मुख्यमंत्री ने किया सब कमेटी का गठन
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ज्ञात हो कि कैडर रिव्यू को लेकर पिछले काफी समय से बात चल रही है। अब महबूबा सरकार में एक बार फिर इस मसले ने तूल पकड़ा। कैबिनेट की बैठक में भाजपा की ओर से आपत्ति जताए जाने के बाद मुख्यमंत्री ने चंद्रप्रकाश गंगा की अध्यक्षता में एक सब कमेटी का गठन किया।
सब कमेटी की कई बैठकें पीडीपी मंत्रियों के श्रीनगर में होने की वजह से नहीं हो पाईं, लेकिन हाल ही में हुई बैठक में इस पर पीडीपी-भाजपा में आम सहमति बन पाई।