किश्तवाड़ के चिशोती में प्राकृतिक आपदा ने कई दर्जन परिवारों पर वज्रपात किया है। अपनों की मौत ने इन्हें तोड़ दिया हैं। जिनके स्वजन लापता हैं वह बदहवास हैं। जबसे उन्हें पता चला कि घायलों को जीएमसी जम्मू में लाया गया है तब से ही स्वजन यहां की दौड़ लगा रहे हैं।
उनके आंसू थम नहीं रहे हैं, उनकी आंखों घायलों की भीड़ में अपनों को खोज रही है। जब अपने नहीं मिलते तो अस्पताल के बाहर बैठकर आंसू बहा लेते हैं।जीएमसी में वीरवार की रात से ही ऐसा दुखदायी स्थिति बनी हुई है। बस एक आस में बिना पलक झपकाए दिन-रात एक किए हैं कि शायद अब उनके परिजन मिल जाएंगे।
मीरां साहिब के बैनागढ़ निवासी गिनी कुमार भी इन्हीं में एक हैं। वह अपनी पत्नी आरती देवी के साथ जीएमसी पहुंचे। उनके आठ परिजन लापता हैं। वह अस्पताल की इमरजेंसी और अन्य वार्डों में खोजते दिखे कि इनमें कोई अपना तो नहीं है। जब कोई नहीं मिला तो बाहर बेंच पर बैठ गए।
पूछने पर बताया कि उनकी माता जीतो देवी, बहन जिन्नी देवी, उनकी बेटियां पीहू 14 वर्ष, बेटा डोकिल, भाभी ममता, उसकी बहन राही, उनकी बेटी परी और भतीजा चीकू घटना के बाद से लापता हैं। गिनी इधर-उधर सभी को ढूंढ़ते रहे लेकिन कहीं से कोई जानकारी नहीं मिल सकी।
12 अगस्त को गए थे यात्रा परगिनी कुमार ने बताया कि 12 अगस्त को 17 लोगों का दल मचैल यात्रा पर रवाना हुआ था। उनको क्या पता था कि इस तरह वह बादल फटने से वह चपेट में आएंगे, पता नहीं वह किस हालत में हैं। उनके बारे में प्रशासन से कोई जानकारी नहीं मिल रही है। सभी के फोन बंद जा रहे हैं। मन में बार-बार किसी अनहोनी की आशंका पैदा हो रही है। 17 लोगों में आठ लापता हैं।