संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। घाटी स्थित केमिकल औद्योगिक इकाई के खिलाफ किसानों और स्थानीय लोगों का गुस्सा मंगलवार को फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने इकाई के गेट के बाहर जोरदार प्रदर्शन कर इकाई से निकलने वाले गंदे और बदबूदार पानी पर रोक लगाने तथा उचित उपचार की व्यवस्था करने की मांग की। प्रदर्शन में आसपास के कई गांवों के पूर्व सरपंच, पंच और नंबरदार भी शामिल रहे।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि केमिकल इकाई की ओर से बिना उचित फिल्टर और ट्रीटमेंट के गंदा पानी नहरी नाले में छोड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि इस पानी के कारण आसपास के कृषि क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं और फसलों को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ किसानों के मवेशियों के बीमार होने और मौत होने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच करवाकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
पूर्व सरपंच कुमार मंगलम ने आरोप लगाया कि औद्योगिक इकाई की ओर से जानबूझकर गंदा पानी नहरी नाले में बहाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर औद्योगिक इकाइयों के आसपास रहने वाले किसानों पर पड़ रहा है। बरसाती नालों के माध्यम से यह पानी किसानों के खेतों के साथ रिहायशी इकाकों तक पहुंच रहा है, जिससे नगरी, नरायणपुर, त्रियाड़ा और फलोट आदि की पंचायतों के दर्जनों गांव प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण औद्योगिक विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण के लिए निर्धारित मानकों का पालन करना चाहिए। यदि किसी औद्योगिक इकाई से प्रदूषण फैल रहा है तो उसे रोकने के लिए उचित ट्रीटमेंट प्लांट और अन्य जरूरी इंतजाम करना इकाई की जिम्मेदारी है।
पूर्व सरपंच प्रतिपाल सिंह निक्कू ने कहा कि ग्रामीणों ने केमिकल इकाई प्रबंधन को पांच दिन का समय दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पांच दिनों के भीतर गंदे और कथित जहरीले पानी की निकासी को रोकने तथा उसके उपचार की पुख्ता व्यवस्था नहीं की गई तो इकाई के बाहर लगातार धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक या तो इकाई को बंद नहीं किया जाता या प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जाता।
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सिडको की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल
प्रदर्शनकारियों ने औद्योगिक क्षेत्र के विकास और नियमन से जुड़ी सिडको की भूमिका पर भी सवाल उठाए। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि संबंधित औद्योगिक इकाई को अभी तक संचालन की अनुमति नहीं मिली है तो फिर यह इकाई किस आधार पर चल रही है। उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभाग से इकाई के दस्तावेजों, संचालन अनुमति तथा प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित मंजूरियों की जांच करवाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कागजों में इकाई को ऑरेंज श्रेणी में रखा गया है, लेकिन मौके पर निकलने वाले गंदे और बदबूदार पानी को देखते हुए इसकी गतिविधियों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों ने प्रदूषण नियंत्रण विभाग से मौके पर निरीक्षण करवाकर पानी के नमूने लेने और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई।