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जम्मू-कश्मीर: सुरक्षाबलों के लिए मुसीबत बने की-पैड जेहादी, फैला रहे आतंकी कंटेंट

Mon, 31 Dec 2018 11:21 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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- फोटो : अमर उजाला
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सोशल मीडिया पर अफवाहों से सांप्रदायिक तनाव पैदा करने वाले की-पैड जेहादी पुलिस के लिए मुसीबत बने हुए हैं। ऐसा कर कश्मीर में कानून-व्यवस्था को खराब किया जा रहा है। घाटी में कई की-पैड जेहादी सक्रिय हैं। इन्हें रोकने के लिए पुलिस ने कवायद शुरू कर दी है।
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खुफिया विभाग के सूत्रों के अनुसार पुलिस ने अब तक आठ कंप्यूटर हैंडलरों (की-पैड जेहादी) के खिलाफ केस दर्ज किया है। कंप्यूटर हैंडलरों पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट को भी सक्रिय किया गया है। लोगों को गुमराह करने वाले व्हाट्सएप और ट्विटर पर जारी किए गए संदेशों से इन आठ हैंडलरों का पता चला है। इनमें दो दुकानदार भी शामिल हैं। 

पुलिस की-पैड जेहादियों का असली चेहरा सोशल साइटों के जरिये सबके सामने लाने के प्रयास में है। पुलिस बंदूक के साथ अफवाह फैलाने वालों पर अंकुश लगाने के लिए कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम को सैकड़ों फेसबुक और ट्विटर अकाउंट के बारे में जानकारी दे चुकी है। जांच के बाद सिम कार्ड बंद किए जा रहे हैं। 
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जांच में फोटोशॉप बन रहा रोड़ा
फोटोशॉप से तस्वीरें बदलकर सोशल साइट्स पर चढ़ाने के कारण की-पैड जेहादियों का पता लगाने में खुफिया विभाग को परेशानी हो रही है। सरकारी मशीनरी को उलझाया जा रहा है। गांदरबल में एक दुकानदार की गलत तस्वीर, जम्मू में एक दुकानदार की तस्वीर आतंकी बताकर अपलोड करने से पुलिस की परेशानी बढ़ी। दोनों मामलों में दुकानदार अपना सामान बेचते हुए पाए गए। 

आईपी एड्रेस से होती है पहचान 
खुफिया विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सिम कार्ड और कंप्यूटर के आईपी एड्रेस से इनका पता लगाया जाता है। वाईफाई का उपयोग करने वालों का भी आईपी एड्रेस से पता किया जाता है। जबकि फेसबुक, इंस्ट्राग्राम, हैंगआउट, व्हाट्सएप, ट्विटर जैसी मैसेजिंग सर्विस को भी ऐसे लोगों पर नजर रखने के लिए कहा गया है। इनकी सूचना मिलते ही सिम कार्ड को बंद करा दिया जाता है।

क्या है की-पैड जेहादी
कंप्यूटर या मोबाइल के जरिये सोशल साइटों पर अफवाह फैलाकर लोगों को भ्रमित कर और दंगे कराने का काम करने वालों को की-पैड जेहादी कहा जाता है। खुफिया तंत्र और पुलिस से बचकर इंटरनेट का इस्तेमाल करने में ये मास्टर होते हैं। घाटी में मुठभेड़ के दौरान या अन्य मौकों पर ये सांप्रदायिक तनाव पैदा करते हैं।
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