कृत्रिम झील से मिलेगा खेतों को पानी
शाहपुरकंडी बांध को रणजीत सागर डैम से 11 किलोमीटर डाउनस्ट्रीम और माधोपुर हाइडल से आठ किमी. अपस्ट्रीम पर बनाया गया है। अब इस पानी को रोका जाना है, बांध बनकर तैयार है। भंडारण का कार्य शुरू होने के बाद यहां एक कृत्रिम झील आकार ले लेगी और उसके बाद इससे रावी-तवी नहर से खेतों तक यह पानी पहुंचाया जाएगा। इससे कठुआ, हीरानगर व सांबा की बंजर हो रही जमीन सिंचित होगी और खेतों में भी हरियाली आएगी।
साल दर साल बढ़ी लागत, पीएम के हस्तक्षेप से दूर हुई थी अड़चनें
दरअसल स्कीम 1964 में तैयार कर भारत सरकार के सुपुर्द की गई थी। जनवरी 1979 में थीन डैम (अब रणजीत सागर डैम) और पावर प्लांट स्कीम के बारे में पंजाब व जम्मू-कश्मीर के बीच समझौता हुआ था। इसके बाद योजना को भारत सरकार के योजना आयोग की ओर से अप्रैल 1982 में औपचारिक तौर पर स्वीकृति दी गई। परियोजना का नींव पत्थर 1995 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने रखा था। इसके बाद काम रुक गया, 2013 में फिर से बांध का निर्माण शुरू हुआ।
तब इस प्रोजेक्ट की लागत 2300 करोड़ रुपये तय हुई थी। लेकिन 2014 में जम्मू-कश्मीर सरकार ने सिंचाई के पानी में हिस्सेदारी, डैम के डिजाइन और जमीनों के मुआवजे को लेकर निर्माण रुकवा दिया। लगातार 50 महीने तक इसका निर्माण कार्य बंद रहा। 2014 में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष रखा। पीएम मोदी के हस्तक्षेप के बाद सभी विवाद सुलझे और आठ सितंबर, 2018 में 'शाहपुरकंडी परियोजना' को एक बार फिर शुरू किया गया। यह प्रोजेक्ट रावी नदी पर बने 600 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता वाले रणजीत सागर बांध का पूरक है। इसका कुल जल भंडार क्षेत्र 952.26 हेक्टेयर है, जिसमें पंजाब में भंडार क्षेत्र 333.91 हेक्टेयर, जबकि जम्मू-कश्मीर में 618.35 हेक्टेयर है। शाहपुरकंडी हाइड्रो प्रोजेक्ट से 2025 के अंत तक बिजली उत्पादन शुरू होने की संभावना है।
रावी कैनाल का 85 फीसदी काम पूरा हो चुका है। हेड रेगुलेटर और एक पुल का काम बाकी है, जो तेजी से चल रहा है। अगर पहले दिन की तरह बहाव जारी रहा, पहाड़ों पर जरूरत के मुताबिक बारिश होती रही तो भी रावी कैनाल को फीड करने वाली झील का लेवल पूरा होने में कम से कम 90 दिन लगेंगे। इस समय के दौरान बकाया काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद रावी कैनाल से कठुआ और सांबा के लोगों को भरपूर पानी मिलने लगेगा। खासकर कंडी क्षेत्र के लोगों की जरूरत पूरी होगी। - अजीत कुमार, कार्यकारी अभियंता, रावी-तवी सिंचाई विभाग, कठुआ